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नोएडा श्रमिक आंदोलन मामले में उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला

-एनएसए का आधार नहीं साबित कर सकी सरकार, हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी को दी बड़ी राहत

-डिटेंशन ऑर्डर निरस्त, गौतमबुद्ध नगर डीएम मेधा रूपम को वेतन से 5 लाख मुआवजा देने का आदेश

राजेश सरकार / प्रयागराज

नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में श्रमिक आंदोलन से जुड़े मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उनके विरुद्ध जारी डिटेंशन ऑर्डर को निरस्त (क्वैश) कर दिया है। साथ ही अदालत ने उन्हें 5 लाख मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने यह राशि गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से अदा किए जाने का निर्देश दिया है। यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने आकृति चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
एनएसए की कार्रवाई के समर्थन में पर्याप्त सामग्री पेश नहीं कर सकी सरकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से आकृति चौधरी को एनएसए के तहत निरुद्ध किए जाने के आधार और पुलिस कार्रवाई के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य एवं दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था। सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने पक्ष रखा। अदालत के समक्ष उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद न्यायालय ने पाया कि एनएसए के तहत निरुद्ध करने की कार्रवाई को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने डिटेंशन ऑर्डर को निरस्त कर दिया।
एफआईआर से पहले शांति भंग की नोटिस पर भी मांगा था जवाब
मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि आकृति चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले क्या उन्हें शांति भंग की आशंका के संबंध में कोई नोटिस जारी किया गया था।अदालत ने कथित रूप से मजदूरों को भड़काने वाले वीडियो और व्हाट्सएप चैट से संबंधित जानकारी और सामग्री भी सरकार से मांगी थी। इन आरोपों के समर्थन में अपेक्षित साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने को लेकर भी न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा था।
5 लाख मुआवजे का आदेश
एनएसए के तहत हुई कार्रवाई को निरस्त करने के साथ ही हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने मुआवजे की राशि जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से दिए जाने का निर्देश दिया है। न्यायालय का यह आदेश एनएसए के तहत की गई निरुद्धि की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका में याची के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के बाद हाई कोर्ट पहुंची थीं आकृति
बताया गया कि ग्रेटर नोएडा की सत्र अदालत द्वारा आकृति चौधरी की चार में से तीन जमानत अर्जियां खारिज किए जाने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। एक मामले में उन्हें राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने सीधे जमानत देने के बजाय उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।
आकृति चौधरी, पत्रकार सत्यम वर्मा समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने के आरोपों में मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस ने आकृति चौधरी और सत्यम वर्मा के खिलाफ रासुका के तहत भी कार्रवाई की थी। पुलिस का आरोप था कि 13 अप्रैल को वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चल रहे श्रमिक आंदोलन के दौरान आकृति चौधरी ने मजदूरों को भड़काने का प्रयास किया, जिसके बाद हिंसा हुई और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि, हाई कोर्ट में एनएसए की कार्रवाई के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने के बाद अदालत ने डिटेंशन ऑर्डर निरस्त करते हुए 5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया। आकृति चौधरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्विस तथा इलाहाबाद हाई कोर्ट की अधिवक्ता चार्ली प्रकाश ने पक्ष रखा।

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