मुख्यपृष्ठनए समाचारमोदी कैबिनेट में ‘सात की बगावत’?

मोदी कैबिनेट में ‘सात की बगावत’?

-सौरव दास का विस्फोटक दावा- इस्तीफा देने से पीछे हटे
-सात मंत्री, इसी कारण अटका मंत्रिमंडल फेरबदल

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

लंबे समय से चर्चा में चल रहे मोदी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर अब नया राजनीतिक विस्फोट हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सौरव दास ने दावा किया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के सात मंत्रियों ने इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया है और इसी कारण बहुप्रतीक्षित कैबिनेट फेरबदल अटक गया है।
दास ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सत्ता प्रतिष्ठान में मौजूद उनके सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के भीतर ‘खुली बगावत’ की स्थिति बन गई है। उनके अनुसार, सात मंत्रियों का कहना है कि उनका रिकॉर्ड बेदाग है, इसके बावजूद उनसे सिर्फ इसलिए पद छोड़ने को कहा जा रहा है ताकि दल-बदल कर भाजपा में आए नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सके।
मोदी मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की अटकलें तेज
कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सौरव दास का यह दावा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से मोदी मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हैं। राजनीतिक हलकों में १६ से १७ नए चेहरों को शामिल करने और कुछ वरिष्ठ मंत्रियों के विभाग बदलने तक की चर्चा चल रही है। हालांकि इन संभावित बदलावों को लेकर अभी कोई आधिकारिक सूची सामने नहीं आई है।
सबसे संवेदनशील अटकल सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी से जुड़े संभावित बदलावों को लेकर है। यह वही उच्चस्तरीय समिति है जिसमें प्रधानमंत्री के साथ गृह, रक्षा, वित्त और विदेश जैसे अहम मंत्रालयों के मंत्री शामिल होते हैं। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया संकट सहित कई महत्वपूर्ण सुरक्षा मामलों पर इसकी बैठकें हुई हैं। लेकिन यहां तथ्यात्मक सावधानी जरूरी है। अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि प्रस्तावित फेरबदल का उद्देश्य विशेष रूप से कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी में बड़ा बदलाव करना है।
इसी तरह सात मंत्रियों द्वारा इस्तीफा न देने की बात भी फिलहाल सौरव दास का दावा है, स्थापित सरकारी तथ्य नहीं। इसके बावजूद यदि आने वाले दिनों में कैबिनेट फेरबदल और टलता है तो यह दावा राजनीतिक रूप से और बड़ा हो सकता है। क्योंकि सवाल अब केवल यह नहीं रहेगा कि नया मंत्री कौन बनेगा। सवाल यह होगा कि क्या प्रधानमंत्री अपनी ही कैबिनेट में मनचाहा फेरबदल करने में प्रतिरोध का सामना कर रहे हैं?

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