मुख्यपृष्ठनए समाचार28 करोड़ की योजना पर 30 करोड़ का दावा... श्रेय की सियासत गरमाई

28 करोड़ की योजना पर 30 करोड़ का दावा… श्रेय की सियासत गरमाई

– महापौर के प्रस्ताव का श्रेय लेने का विधायक पर आरोप…पार्षद आशीष द्विवेदी ने सोशल मीडिया पोस्ट से जताया विरोध

राजेश सरकार / प्रयागराज

शहर में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए प्रस्तावित सीवेज पंपिंग स्टेशन की योजना को लेकर अब विकास से ज्यादा श्रेय की सियासत गरमा गई है। महापौर के प्रस्ताव को लेकर विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी के कालिदास मार्ग पहुंचकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करने और योजना का श्रेय लेने के प्रयास पर पार्षद आशीष द्विवेदी ने सोशल मीडिया के जरिए तीखा विरोध दर्ज कराया है। पार्षद आशीष द्विवेदी की सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक, नगर निगम की ओर से यह योजना महीनों पहले शासन को भेजी गई थी और करीब 10 दिन पहले ही इसे स्वीकृति मिली है। उनका दावा है कि योजना की वास्तविक लागत 28 करोड़ रुपये है, जबकि इसे 30 करोड़ रुपये की योजना बताकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्वीकृत योजना का श्रेय किसी दूसरे की मेहनत के नाम नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी की ओर से साझा की गई जानकारी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष शहर के उत्तरी क्षेत्र के जलभराव को दूर करने के लिए 30 करोड़ रुपये की लागत से सीएमपी के पास एक सीवेज पंपिंग स्टेशन और मोरी गेट तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन की योजना का उल्लेख है। साथ ही फतेहपुर बिछुआ तालाब पर सीवेज पंपिंग स्टेशन तथा अन्य स्थानों पर नालों के निर्माण की बातें भी सामने आई हैं।
यही अंतर अब विवाद की वजह बन गया है। योजना 28 करोड़ की है या 30 करोड़ की और इसकी पहल किसने की—इन्हीं सवालों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। पार्षद ने अपनी पोस्ट में महापौर, क्षेत्रीय पार्षद और नगर निगम को योजना का श्रेय देते हुए दूसरे की मेहनत का श्रेय नहीं लेने की अपील की है।
मामला सिर्फ रकम के अंतर तक सीमित नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे विकास कार्यों पर अपना नाम चमकाने की होड़ के रूप में भी देखा जा रहा है। अब देखना यह है कि नगर निगम और शासन की ओर से योजना की स्वीकृत लागत और प्रस्तावक संस्था को लेकर आधिकारिक स्थिति क्या सामने आती है।

अन्य समाचार