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४०० से ज्यादा हृदयरोगियों पर संकट…‘जेजे’ में १९ डॉक्टरों की नियुक्ति रद्द!.. कार्डियोलॉजी समेत १० विभागों में हाहाकार

द्रुप्ती झा / मुंबई

एशिया के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार मुंबई के जे.जे. अस्पताल को प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी अनदेखी का दीमक चाट रहा है। पहले से ही कर्मचारियों की भारी किल्लत से जूझ रहे जे. जे. अस्पताल के कार्डियोलॉजी समेत विभिन्न प्रमुख विभागों से रातों-रात १९ सहायक प्रोफेसरों की नियुक्तियां रद्द कर दी गई हैं। प्रशासन के इस तुगलकी फरमान से सीधे तौर पर गरीब व जरूरतमंद मरीजों पर संकट मंडराने लगा है।
कार्डियोलॉजी विभाग से अकेले ७ डॉक्टरों को हटाया गया है। इसके अलावा सर्जरी (२), नेत्र विज्ञान (२), ऑर्थोपेडिक्स (१), पीडियाट्रिक्स (१), कान-नाक-गला (१), रेडियोलॉजी (१), थोरैसिक सर्जरी (१), न्यूरोसर्जरी (१), यूरोलॉजी (१) और पैथोलॉजी/मनोचिकित्सा (१) विभाग की बलि ली गई है। ४ डॉक्टरों के हवाले पूरा विभाग नजर आ रहा है। जे.जे. के कार्डियोलॉजी विभाग में रोजाना ४०० से ५०० मरीज इलाज के लिए आते हैं। ७ प्रोफेसरों को हटाने के बाद अब यहां सिर्फ ४ प्रोफेसर बचे हैं।
नई नियुक्तियां नहीं
अस्पताल में हृदय रोगियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए लंबे समय से सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती की पुरजोर मांग की जा रही थी। सरकार ने नई नियुक्तियां करने के बजाय, गरीब मरीजों के स्वास्थ्य की चिंता किए बिना स्थानीय स्तर पर सेवा दे रहे सहायक प्रोफेसरों की ही नियुक्तियां रद्द कर दी।
इलाज मिलना अब नामुमकिन
अस्पताल में हर साल लगभग ६ हजार हृदय प्रक्रियाएं होती हैं। डॉक्टरों की इस कमी से एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर और डिवाइस क्लोजर जैसी अति-महत्वपूर्ण सर्जरी और जांच का समय अनिश्चितकाल के लिए टल जाएगा। आईसीयू और आपातकालीन सेवा में आने वाले गंभीर हृदय रोगियों को समय पर विशेषज्ञ इलाज मिलना अब नामुमकिन सा हो गया है।

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