सना खान
मुंबई में प्यार की शुरुआत अब सिर्फ कॉलेज, ऑफिस या दोस्तों के जरिए नहीं होती। डेटिंग ऐप पर हुई मुलाकात, इंस्टाग्राम पर भेजा गया संदेश या कैफे में हुई मुलाकात भी रिश्ते की शुरुआत बन रही है। मुंबई के युवाओं के बदलते मेल-जोल को लेकर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि यह सिर्फ सोशल मीडिया का चलन नहीं, बल्कि रिश्ते बनाने के तरीके में हो रहा बदलाव है। ऐसे में सवाल है कि डिजिटल माध्यमों से बन रहे इन नए रिश्तों में भरोसा और सुरक्षा की जगह कितनी मजबूत है?
मुंबई के १८ से २५ वर्ष के १,६४१ कॉलेज छात्रों पर हुए अध्ययन में १२.७ प्रतिशत ने डेटिंग ऐप इस्तेमाल करने की बात कही। इनमें सबसे बड़ा कारण प्यार या जीवनसाथी की तलाश (३०.३ प्रतिशत) रहा।
इंस्टाग्राम भी बना डेटिंग का जरिया
अध्ययन के अनुसार ३८.१ प्रतिशत युवाओं ने डेटिंग के लिए दूसरे सामाजिक माध्यमों का इस्तेमाल किया। इनमें ८४.५ प्रतिशत ने इंस्टाग्राम का इस्तेमाल किया। यानी किसी की पोस्ट या कहानी पर आया संदेश भी बातचीत की शुरुआत बन सकता है और आगे चलकर मुलाकात व रिश्ते तक पहुंच सकता है, लेकिन मुलाकात और रिश्ता बनने में अंतर है। ४९ प्रतिशत डेटिंग ऐप उपयोगकर्ताओं की ऐप पर मिले व्यक्ति से मुलाकात हुई, जबकि केवल २०.७ प्रतिशत ने सार्थक रिश्ता बनने की बात कही।
प्यार के साथ सुरक्षा भी
डिजिटल डेटिंग का दूसरा पहलू सुरक्षा है। अध्ययन में ११.५ प्रतिशत डेटिंग ऐप उपयोगकर्ताओं ने किसी अप्रिय घटना या बाद में पछतावे की बात कही। इनमें पहचान उजागर होने या धमकी देने, आर्थिक ठगी और यौन हिंसा जैसे मामले भी सामने आए।
मुंबई में प्यार का पता अब कैफे से मोबाइल स्क्रीन तक पहुंच गया है। लेकिन स्वाइप और संदेशों के इस दौर में क्या भरोसा भी उतनी ही तेजी से बन रहा है? यही बदलते रिश्तों की दुनिया का सबसे बड़ा सवाल है।
