मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम : धर्म, जाति, भाषा के आधार पर वैमनस्य फैलाना अपराध है

कोर्ट-रूम : धर्म, जाति, भाषा के आधार पर वैमनस्य फैलाना अपराध है

 एड. कनई बिस्वास
भाग:६६
धारा १९६, १९७ और १९८

भारतीय न्याय संहिता, २०२३ देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और निष्पक्ष प्रशासन की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान करती है। यदि कोई व्यक्ति धर्म, जाति, भाषा, जन्मस्थान या अन्य आधारों पर समाज में नफरत पैâलाता है, राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले बयान देता है या कोई लोक सेवक जानबूझकर कानून का उल्लंघन करके किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाता है, तो यह गंभीर अपराध है। धारा १९६, १९७ और १९८ इन्हीं अपराधों से संबंधित हैं।
केस स्टडी – १: ‘विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य पैâलाना’ (धारा १९६)
एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर लगातार ऐसे संदेश और वीडियो प्रसारित किए, जिनमें दो धार्मिक समुदायों के विरुद्ध भड़काऊ बातें कही गर्इं। इन संदेशों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने धर्म, जाति, भाषा, जन्मस्थान, निवास या अन्य आधार पर वैमनस्य पैâलाने वाला कार्य किया?
क्या उसके कृत्य से सामाजिक सद्भाव प्रभावित होने की संभावना थी?
क्या उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की भूमिका सिद्ध करते हैं?
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने विभिन्न समूहों के बीच नफरत या वैमनस्य पैâलाने का कार्य किया, तो उसके विरुद्ध धारा १९६ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १९६ का उद्देश्य समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखना है। किसी भी समुदाय के विरुद्ध घृणा पैâलाना या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले कार्य करना कानूनन अपराध है।
केस स्टडी – २: ‘राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल कथन’ (धारा १९७)
एक सार्वजनिक सभा में वक्ता ने ऐसे बयान दिए, जिनका उद्देश्य लोगों के बीच अलगाव की भावना पैदा करना और राष्ट्रीय एकता को कमजोर करना था। भाषण का वीडियो जांच एजेंसियों के पास पहुंचा।
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल कथन या आरोप लगाए, तो उसके विरुद्ध धारा १९७ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १९७ का उद्देश्य ऐसे कथनों और आरोपों पर रोक लगाना है, जो भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
केस स्टडी- ३: ‘लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा कर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना’ (धारा १९८)
एक राजस्व अधिकारी ने व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण जानबूझकर कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और एक व्यक्ति की भूमि का रिकॉर्ड गलत दर्ज कर दिया। इससे उस व्यक्ति को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
पैâसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि लोक सेवक ने जानबूझकर कानून का उल्लंघन करके किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाई, तो उसके विरुद्ध धारा १९८ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १९८ यह सुनिश्चित करती है कि लोक सेवक अपने अधिकारों का दुरुपयोग न करें। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर कानून की अवहेलना कर किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो वह इस धारा के अंतर्गत दंड का भागी बन सकता है।
(अगले अंक में: धारा १९९, २०० और २०१ – लोक सेवक द्वारा कानून के अधीन दिए गए निर्देश की अवज्ञा करना, पीड़ित का उपचार न करने पर दंड तथा लोक सेवक द्वारा किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाने की मंशा से गलत दस्तावेज़ तैयार करना से संबंधित अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)

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