मुख्यपृष्ठनए समाचारअरुणाचल पर चीन की नजर...लेकिन पीएलए अभी तैयार नहीं!!

अरुणाचल पर चीन की नजर…लेकिन पीएलए अभी तैयार नहीं!!

-चीनी रिपोर्ट का कबूलनामा, अभी हमला क्यों नहीं?
-सीमा पर सड़कें, सुरंगें और बस्तियां खड़ी कर ‘सही वक्त’ का इंतजार कर रहा ड्रैगन

एजेंसी / नई दिल्ली

चीन भले ही अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिणी तिब्बत’ कहकर बार-बार दावा ठोकता हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फिलहाल वह बड़ा सैन्य दुस्साहस करने की स्थिति में नहीं है। यह दावा किसी भारतीय एजेंसी का नहीं, बल्कि चीन के ही लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘सोहू’ पर प्रकाशित एक विश्लेषण का है। इस विश्लेषण में खुद चीनी नजरिए से स्वीकार किया गया है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सामने अरुणाचल मोर्चे पर सबसे बड़ी बाधा भारतीय सेना से ज्यादा कठिन भूगोल, खराब मौसम और अंतिम छोर तक मजबूत सैन्य रसद पहुंचाने की चुनौती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने पिछले कुछ सालों में तिब्बत में ल्हासा-न्यिंगची रेलवे, नई सड़कों, सुरंगों, हवाई पट्टियों और सैन्य सुविधाओं के जरिए अपनी पिछली सप्लाई लाइन काफी मजबूत की है। तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में दोहरे उपयोग वाली बस्तियां और मॉडल गांव भी तेजी से बसाए जा रहे हैं। लेकिन भारी हथियारों, टैंकों और बड़ी संख्या में सैनिकों को सालभर अग्रिम मोर्चे पर टिकाए रखने की क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है।
चीनी लेख का निष्कर्ष बेहद साफ है – समय अभी अनुकूल नहीं है, इसलिए जल्दबाजी में युद्ध नहीं किया जाएगा। विश्लेषण कहता है कि ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, भूस्खलन और बर्फबारी जैसे कारक पीएलए की आक्रामक क्षमता को सीमित करते हैं।
भारत के लिए चेतावनी
यही हिस्सा भारत के लिए सबसे बड़ी चेतावनी भी है। पीएलए मामलों के विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) अंशुमान नारंग ने इस आकलन को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे कमजोरी नहीं, बल्कि चीन की दीर्घकालिक रणनीति के तौर पर देखना चाहिए। नारंग के अनुसार, चीन सीमा के करीब बुनियादी ढांचा और ऐसी स्थायी बस्तियां तैयार कर रहा है जिन्हें भविष्य में पलटना कठिन होगा। वह तिब्बत को आंतरिक रूप से मजबूत करने, रसद की बाधाएं दूर करने और रणनीतिक ‘लॉन्च पैड’ तैयार करने में लगा है।
सीधा टकराव नहीं चाहता चीन
तब तक उसकी नीति सीधे टकराव को टालकर ‘ग्रे-जोन’ रणनीति अपनाने की है – यानी बिना युद्ध लड़े हर मौके पर छोटी-छोटी बढ़त हासिल करना, गश्त बढ़ाना और यथास्थिति को धीरे-धीरे अपने पक्ष में बदलना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह लेख शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से ठीक पहले आया है, तो इसे केवल सैन्य विश्लेषण नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा मनोवैज्ञानिक संदेश भी मानना चाहिए।
भारत के लिए चिंताजनक स्थिति
संदेश चिंताजनक और स्पष्ट है- चीन अरुणाचल को भूला नहीं है। वह पीछे नहीं हटा है, बल्कि तैयारी पूरी होने का इंतजार कर रहा है। भारत के लिए जरूरी है कि वह सीमा पर अपने बुनियादी ढांचे, निगरानी और तैनाती में कोई ढील न दे।

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