-एक ही दिन मारे गए हजारों नागरिक लाखों हुए बेघर
-मोसाद और इजरायली सेना की हुई मिट्टी पलीद
मनमोहन सिंह
‘मिस्टर नेतन्याहू, गाजा में याह्या सिनवार एक बेहद खतरनाक और बड़े सैन्य हमले की तैयारी में है। इससे भारी रक्तपात होगा, संभालिए इसे…’
‘७ अक्टूबर २०२३ के भीषण हमास हमले से ठीक १० दिन पहले, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (एमबीजेड) ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फोन पर यह सीधी चेतावनी दी थी।’ आप चिंता न करें, इजरायल हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। खतरा गाजा से नहीं, बल्कि वेस्ट बैंक से है।’, नेतन्याहू का यह बेफिक्र जवाब इतिहास की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।४५ मिनट तक चली इस बातचीत में यूएई राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को साफ आगाह किया था कि हमास एक विनाशकारी ऑपरेशन की अंतिम रणनीति बना चुका है। इसके बावजूद नेतन्याहू ने न सिर्फ इस खुफिया चेतावनी को खारिज कर दिया, बल्कि सबसे बड़ी लापरवाही यह की कि इस कॉल की जानकारी अपनी खुफिया एजेंसियों, मोसाद, शिन बेट या सेना प्रमुख के साथ साझा ही नहीं की। हालांकि, नेतन्याहू कार्यालय ने इस बातचीत को ‘सफेद झूठ’ बताया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी दल इसे देश सुरक्षा के साथ आपराधिक खिलवाड़ मान रहे हैं।
शीर्ष स्तर पर हुई इस भयानक अनदेखी की कीमत पूरे इजरायल को ७ अक्टूबर के ‘ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड’ में अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
ऐतिहासिक नरसंहार: हमले के ही दिन १,२०० से अधिक बेकसूर नागरिकों, महिलाओं और सुरक्षाकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जो इजरायल के इतिहास का एक दिन में सबसे बड़ा नरसंहार था।
बंधक संकट: हमास के लड़ाके २५१ लोगों (इजरायली व विदेशी नागरिकों) को अगवा करके गाजा की अंधेरी सुरंगों में खींच ले गए।
बस्तियों का विनाश और विस्थापन: दक्षिणी इजरायल के कई गांव (किबुत्ज) पूरी तरह जलकर राख हो गए और सीमावर्ती इलाकों से १,००,००० से अधिक नागरिकों को बेघर होकर पलायन करना पड़ा।
अभेद्य सुरक्षा का भ्रम टूटा: दुनिया की सबसे ताकतवर मानी जाने वाली खुफिया एजेंसी मोसाद और इजरायली सेना (आईडीएफ) की अजेयता का दावा एक ही झटके में पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
यदि नेतन्याहू ने उस दिन यूएई राष्ट्रपति की चेतावनी को गंभीरता से लेकर सेना को अलर्ट पर रख दिया होता, तो इजरायल इतिहास के इस सबसे काले अध्याय और उसके बाद भड़की अंतहीन तबाही से बच सकता था।
