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कश्मीर कितना सुधरा मोदी राज में?..७ हजार कश्मीरी पंडितों को फिर धमकी!.. ‘नौकरी छोड़ो या जान गंवाओ’

-पते, फोन नंबर और गाड़ियों तक की जानकारी लीक होने का दावा; पुनर्वास के साथ सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल

सामना संवाददाता / श्रीनगर

अनुच्छेद ३७० हटने के बाद केंद्र सरकार लगातार जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति और विकास का दावा करती रही है, लेकिन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिली ताजा आतंकी धमकी ने एक बार फिर सुरक्षा की जमीनी तस्वीर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे प्रॉक्सी संगठन यूएलसी ने पीएम पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे करीब ७,००० कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कथित तौर पर नौकरी छोड़ने या जानलेवा परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। इससे भी गंभीर दावा यह है कि कुछ कर्मचारियों के घरों के पते, मोबाइल नंबर और वाहनों के पंजीकरण नंबर तक सार्वजनिक किए गए हैं।
कश्मीर में बदलाव के दावों पर बड़ा सवाल…डर अब भी क्यों बरकरार?
कश्मीर में बदलाव के दावों के बीच डर का साया फिर गहराता दिख रहा है। हाल के हफ्तों में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकियां मिलने की खबरों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खतरे के बाद कुछ कर्मचारियों को छुट्टी लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह तक दी गई। हाल के सप्ताहों में ऐसी कई धमकियां सामने आ चुकी हैं, इससे पहले प्रशासन ने खतरे के बाद कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को छुट्टी पर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह भी दी थी।
सरकार ने वर्षों में नौकरियां, ट्रांजिट आवास और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है, लेकिन ताजा घटनाक्रम बताता है कि असली कसौटी केवल नियुक्तियों और मकानों की संख्या नहीं है। सवाल यह है कि क्या कश्मीरी पंडित बिना भय के घाटी में रह और नौकरी कर पा रहे हैं?
यदि हजारों कर्मचारियों को आज भी जान बचाने और नौकरी के बीच चुनाव की धमकी मिल रही है, तो स्वाभाविक सवाल उठेगा। कश्मीर में वास्तव में कितना बदलाव आया?

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