सामना संवाददाता / पुणे
गणेशोत्सव की पहचान माने जाने वाले मान के पांच गणपतियों के दर्शन को हर वर्ष राजनीतिक नेताओं के पुणे दौरे में विशेष स्थान दिया जाता है। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के पुणे गणेश दर्शन दौरे में इस वर्ष अलग ही तस्वीर देखने को मिली। ग्रामदेवता कसबा गणपति और श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति के दर्शन के बाद नेताओं का दौरा भाजपा के स्थानीय पदाधिकारियों से जुड़े गणेश मंडलों की ओर मुड़ गया।

मान के पांच गणपतियों में से कसबा गणपति को छोड़कर तांबडी जोगेश्वरी, गुरुजी तालीम, तुलशीबाग और केसरीवाड़ा इन चार गणपतियों को दौरे में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी मंडल और अखिल मंडई मंडल के शारदा गजानन गणपति के भी दर्शन नहीं किए गए। इससे भाजपा नेताओं के इस दौरे के प्राथमिकता क्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
दगडूशेठ हलवाई गणपति के दर्शन के बाद नेताओं ने भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे के साने गुरुजी तरुण मित्र मंडल और केंद्रीय राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोल से जुड़े श्री साई मित्र मंडल ट्रस्ट का दौरा किया। इससे ऐसा नजर आया कि पुणे के पारंपरिक गणेशोत्सव के मान के मंडलों की तुलना में इस वर्ष पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों से जुड़े मंडलों को अधिक महत्व दिया गया।

हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान राज्य के प्रमुख नेता पुणे के मान के पांच गणपति, प्रमुख गणेश मंडल और राजनीतिक पदाधिकारियों से जुड़े मंडलों में दर्शन के लिए जाते हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं की ओर से बड़े स्तर पर तैयारियां भी की जाती हैं। हालांकि, इस वर्ष भीड़ और यातायात की समस्या को ध्यान में रखते हुए दौरे को चुनिंदा मंडलों तक सीमित रखा गया बताया जा रहा है। भाजपा के सूत्रों के अनुसार, सभी मंडलों में जाना संभव नहीं होने के कारण यह कार्यक्रम सीमित रखा गया।
