-बीएमसी हॉस्पिटल में दवाइयों का टोटा
-केईएम, सायन, नायर और कूपर में मरीज बेहाल
-मशीनें बंद, जांच के लिए महीनों की वेटिंग
द्रुप्ति झा / मुंबई
एशिया की सबसे अमीर मुंबई मनपा के अरबों रुपए के स्वास्थ्य बजट के बावजूद उसके प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। केईएम, सायन, नायर और कूपर जैसे बड़े अस्पतालों में दवाइयों, इंजेक्शन, रुई और पट्टियों जैसी जरूरी सामग्री की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। हालत यह है कि मरीजों के परिजनों को इलाज के लिए जरूरी सामान बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदना पड़ रहा है। अस्पताल में दवाइयों की कतार में खड़ी सकीना शेख ने बताया कि निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से बचने के लिए लोग मनपा अस्पतालों का रुख करते हैं, लेकिन यहां भी बुनियादी जरूरतों के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
दूसरी ओर, करोड़ों रुपए की एमआरआई और सीटी स्वैâन मशीनों की खराबी और रखरखाव की समस्या ने जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केईएम में दो सीटी स्वैâन में से एक और दो एमआरआई में से एक मशीन चालू होने की जानकारी है। सायन अस्पताल में भी सीटी स्वैâन और एमआरआई सेवाओं पर दबाव बना हुआ है। एक मशीन बंद होते ही मरीजों की कतार बढ़ जाती है और गैर-आपातकालीन मरीजों को एमआरआई के लिए २ से ३ महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
मनपा पीपीपी मॉडल के तहत बाहरी डायग्नोस्टिक केंद्रों से टाइ-अप का दावा करती है, लेकिन मरीजों का भटकना खत्म नहीं हुआ है। अरबों का बजट आखिर किस काम का, जब अस्पताल में दवा भी नहीं और जांच मशीन भी नहीं? स्वास्थ्य अधिकारियों से जवाब मांगने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने चुप्पी साध ली।
मशीन बंद, मरीजों का इंतजार लंबा!
केईएम और सायन जैसे प्रमुख अस्पतालों में एमआरआई-सीटी स्वैâन मशीनों की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। एक मशीन बंद होते ही जांच व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है। गैर-आपातकालीन मरीजों को एमआरआई के लिए २ से ३ महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।
