मुख्यपृष्ठनए समाचार१ लाख में टीईटी पेपर...जमानत में मूल प्रमाणपत्र!

१ लाख में टीईटी पेपर…जमानत में मूल प्रमाणपत्र!

-महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा में सौदेबाजी का सनसनीखेज आरोप
-८० हजार से १ लाख तक मांगे

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में कथित पेपर-लीक नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। जांच में आरोप सामने आया है कि अभ्यर्थियों से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने अथवा परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर ८० हजार से १ लाख रुपए तक मांगे जाते थे। सौदा बीच में न टूटे, इसके लिए उम्मीदवारों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र कथित रूप से जमानत के तौर पर रख लिए जाते थे।
इस व्यवस्था से संकेत मिलता है कि कथित गिरोह ने अभ्यर्थियों से रकम वसूलने के लिए सुनियोजित तरीका अपना रखा था। मूल प्रमाणपत्र अपने पास रखकर उम्मीदवारों पर भुगतान करने का दबाव बनाया जाता था। रकम पूरी मिलने के बाद ही दस्तावेज लौटाए जाने का आरोप है।
यदि जांच में ये आरोप प्रमाणित होते हैं तो मामला केवल परीक्षा में नकल कराने या प्रश्नपत्र बेचने तक सीमित नहीं रहेगा। यह बेरोजगार युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाने, उनके भविष्य से खिलवाड़ करने और शिक्षक भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने वाला संगठित अपराध साबित हो सकता है।
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रश्नपत्र कथित नेटवर्क तक कैसे पहुंचा? क्या इसमें परीक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी कर्मचारी, अधिकारी अथवा बाहरी एजेंसी की भूमिका थी? अभ्यर्थियों के दस्तावेज कहां रखे जाते थे और अब तक कितने लोगों से रकम वसूली गई? इन सभी प्रश्नों के उत्तर भी आवश्यक हैं।
फिलहाल रकम मांगने और मूल प्रमाणपत्र रखने की व्यवस्था जांच में सामने आए आरोप हैं। पूरे नेटवर्क तथा किसी संभावित राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण पर अंतिम निष्कर्ष निकलना अभी बाकी है।
केवल दलाल नहीं, ‘पेपर के स्रोत’ को पकड़ो!
कुछ अभ्यर्थियों और बिचौलियों की गिरफ्तारी से जांच पूरी नहीं मानी जा सकती। पेपर यदि परीक्षा से पहले बाहर आया तो वह सबसे पहले किसके पास से निकला? प्रश्नपत्र की छपाई, भंडारण और वितरण से जुड़े प्रत्येक स्तर की जांच होनी चाहिए। असली परीक्षा जांच एजेंसियों की है, वे केवल छोटे दलालों तक रुकती हैं या व्यवस्था में बैठे बड़े चेहरों तक पहुंचती हैं।

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