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मनपा में भ्रष्टाचार का बोलबाला!

-महायुति राज में ५ साल में झोपड़ियों का ‘मल्टीस्टोरी साम्राज्य’
-मुंबई की झोपड़पट्टियों में टीन की झोपड़ियां बनीं ४-५ मंजिला इमारतें, मनपा की निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की झोपड़पट्टियों में अवैध निर्माण अब केवल टीन की छत और छोटी झोपड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। कई घनी बस्तियों में झोपड़ियों पर मंजिलें चढ़ाकर चार से पांच मंजिला ढांचे खड़े किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जोगेश्वरी, मानखुर्द, मंडाला, गोवंडी, वडाला-अंटॉप हिल, संगम नगर, कोलीवाड़ा और प्रतीक्षा नगर सहित कई इलाकों में तेजी से बढ़ते अतिक्रमण ने मुंबई के नियोजन और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभियान का एलान, फिर भी निर्माण जारी होने का दावा
मुंबई मनपा ने १ अक्टूबर से ३१ दिसंबर २०२६ तक १४ फुट और उससे अधिक ऊंची अनधिकृत झोपड़ियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनपा की चेतावनी और अभियान की घोषणा के बावजूद संबंधित झोपड़पट्टी क्षेत्रों में अवैध रूप से मंजिलें बढ़ाने का काम जारी है। इससे मनपा की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मनपा के मुताबिक, मुंबई में कुल २,२३,१५० झोपड़ियां हैं और इनमें ३९,१११ झोपड़ियां १४ फुट या उससे अधिक ऊंची हैं। इनमें अकेले पूर्वी उपनगरों में ३१,२२७ झोपड़ियां शामिल हैं। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों का दावा है कि मनपा के आंकड़े वास्तविक स्थिति की पूरी तस्वीर पेश नहीं करते। उनका कहना है कि मुंबई में पांच लाख से अधिक झोपड़ियां हैं और बड़ी संख्या में झोपड़ियां बहुमंजिला हो चुकी हैं।
‘पैदल यात्री प्रथम’ अभियान पर भी सवाल
समाजसेवक नंदलाल पांडे ने कहा कि एक तरफ ‘पैदल यात्री प्रथम’ अभियान के तहत फुटपाथ खाली कराने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर की बस्तियों में अवैध निर्माण लगातार बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पैसे के खेल में बढ़ती गर्इं मंजिलें?
आरोप है कि मनपा और पुलिस अधिकारियों की कथित मिलीभगत से झोपड़ियों में अवैध रूप से मंजिलें बढ़ाने का रास्ता आसान किया जाता है। यह भी आरोप लगाया जाता रहा है कि झोपड़पट्टी वाले वार्डों में तबादले के लिए अधिकारी कथित तौर पर भारी-भरकम रकम खर्च करते हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि ऐसे वार्डों में अधिकारियों की प्राथमिकता आम जनता की समस्याओं के बजाय अवैध निर्माण से होने वाली कथित कमाई बन गई है।
वर्षों से मंजिलें बढ़ती रहीं, मनपा सोती रही?
विपक्ष का आरोप है कि ये निर्माण अचानक एक-दो दिन में खड़े नहीं हुए हैं। पिछले कई वर्षों से जब झोपड़ियों पर एक के बाद एक मंजिलें बढ़ती रहीं, तब मनपा का तंत्र क्या कर रहा था? विपक्ष ने महायुति सरकार और उसके अधीन स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

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