सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में शिक्षक बनने की उम्मीद रखने वाले युवाओं की मेहनत और भविष्य के साथ कथित तौर पर किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका गंभीर मामला शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के पेपर लीक प्रकरण से सामने आया है। भिवंडी अदालत में दाखिल करीब ३,५०० पन्नों के आरोपपत्र में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि टीईटी की लीक हुई प्रश्नपत्रिका को कथित तौर पर १ लाख रुपए तक में बेचने की कोशिश की गई। संभावित खरीदारों से मूल शैक्षणिक दस्तावेज भी कथित तौर पर सुरक्षा के तौर पर लिए जाते थे।
यह मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की परीक्षा व्यवस्था की निगरानी और प्रश्नपत्रों की गोपनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। २८ जून को होने वाली टीईटी परीक्षा से दो दिन पहले, २६ जून को भिवंडी में पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रश्नपत्र सामने आने के बाद पूरा मामला उजागर हुआ था। जांच में प्रश्नपत्र के आगरा स्थित छापाखाने से बाहर निकाले जाने की बात सामने आई है। आरोपपत्र के अनुसार, दो कर्मचारियों ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र जूतों के तलवों में छिपाकर बाहर निकाले और इसके बदले उन्हें ८-८ हजार रुपए दिए गए।
१८ आरोपी, १६ गिरफ्तार
भिवंडी अदालत में दाखिल आरोपपत्र में कुल १८ आरोपियों के नाम हैं। इनमें कथित मुख्य आरोपी बिजेंद्र गुप्ता भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, अब तक १६ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि दो आरोपी फरार बताए गए हैं। जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य सामग्री को शामिल किया गया है।
युवाओं के भविष्य का सौदा?
टीईटी जैसी परीक्षा शिक्षक बनने के इच्छुक हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी है। ऐसे में प्रश्नपत्र को कथित तौर पर लाखों रुपए में बेचने की कोशिश सामने आना महायुति सरकार की परीक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े करता है। सरकार लगातार पारदर्शी और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था के दावे करती रही है, लेकिन इस मामले में छापाखाने से प्रश्नपत्र बाहर निकलना और फिर उसे कथित तौर पर उम्मीदवारों तक पहुंचाने की कोशिश होना पूरी व्यवस्था की चूक को उजागर करता है।
