मुख्यपृष्ठनए समाचारस्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने किया सीएम कैशलेस योजना का बहिष्कार

स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के शिक्षकों ने किया सीएम कैशलेस योजना का बहिष्कार

-न्यूनतम वेतनमान को लेकर नाराज हैं शिक्षक

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

यूपी के अनुदानित महाविद्यालयों में स्ववित्त पोषित योजना के अंतर्गत काम कर रहे शिक्षकों ने अपनी मांगे न माने जाने पर सोमवार को मुख्यमंत्री कैशलेस योजना का बहिष्कार करने का फैसला किया। सुल्तानपुर में इस बाबत जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा ।
डीएम से मिलने पहुंचे शिक्षक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित मांगपत्र जिलाधिकारी को दिया। के एन आई अनुदानित महाविद्यालय स्ववित्त पोषित शिक्षक संघ के प्रतिनिधि डॉ कुंज बिहारी पाण्डेय ने इस अवसर पर कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में लगभग पच्चीस वर्ष से अनुमोदित शिक्षक अत्यंत अल्प वेतन पर पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। इन शिक्षकों ने हमेशा न्यूनतम वेतनमान या विनियमितीकरण की मांग की है जिसे दरकिनार करते हुए सरकार ने कैशलेस का वह झुनझुना पकड़ा दिया है जिसे कभी हमने मांगा ही नहीं था । संत तुलसीदास पीजी कालेज के डॉ प्रभात सिंह ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए सरकार फ्री स्कूटी , फ्री मोबाइल आदि बांटने में रुपये का दुरुपयोग कर रही है। इस तरह की योजनाओं में व्यय होने वाली धनराशि से काफी कम खर्च करके अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्त पोषित शिक्षकों के भविष्य ,वेतन और सेवा सुरक्षा को लेकर योजना बनाई जा सकती है। पूरे प्रदेश के सरकारी डिग्री कालेजों में पढ़ा रहे स्ववित्त पोषित शिक्षकों ने अपनी मांगे न माने जाने तक कैशलेस योजना के बहिष्कार का निर्णय लिया है। गनपत सहाय पीजी कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ विनय पाण्डेय ने कहा कि एक तरफ शिक्षक जीने का आधार मांग रहा है तो दूसरी तरफ सरकार के नुमाइंदे बिना मांगे शिक्षकों को अस्पताल का रास्ता दिखा रहे हैं। जब सुचारू रूप से हमारे जीवन जीने पर ही संकट खड़ा हो तो हम कैशलेस कार्ड लेकर क्या करेंगे। राणा प्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह रवि ने कहा कि एक ही छत के नीचे सरकार से वेतन पाने वाले और स्ववित्त पोषित योजना में कार्य करने वाले शिक्षकों की कार्य प्रणाली और सेवा में वेतन को छोड़कर कोई अंतर नहीं है। अनुदानित महाविद्यालयों में वेतन को लेकर चल रही दोहरी व्यवस्था शीघ्र खत्म होनी चाहिए।इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शिशिर श्रीवास्तव, डॉ विवेक सिंह, डॉ स्तुति शुक्ल, डॉ शशि प्रकाश मिश्र, डॉ प्रदीप शर्मा व डॉ अजीत सिंह उपस्थित रहे।

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