-हो सकती है अघोषित बिजली कटौती
त्योहारों का सीजन शुरू होते ही देश में बिजली आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दिवाली से ठीक पहले देश के कई राज्यों में बिजली की भारी कमी का खतरा मंडराने लगा है। इसका मुख्य कारण कोयला आधारित बिजली संयंत्रों (थर्मल पावर प्लांट) में कोयले की गंभीर किल्लत होना है।
हालिया रिपोर्टों और आंकड़ों के अनुसार, देश भर के लगभग ७४ कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में तीन दिन से भी कम का कोयला स्टॉक बचा है। दिवाली के अवसर पर जहां एक ओर रोशनी, सजावट और औद्योगिक गतिविधियों के कारण बिजली की मांग अपने चरम पर होती है, वहीं दूसरी ओर कोयले का यह गिरता स्तर बिजली संकट का बड़ा संकेत दे रहा है।
कोयले की कमी के प्रमुख कारण
मांग में अचानक बढ़ोतरी: कोरोना काल और मानसून के बाद आर्थिक गतिविधियों में आई तेजी के कारण बिजली की खपत अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है।
अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में उछाल: वैश्विक बाजार में कोयले के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे आयातित कोयले पर निर्भर संयंत्रों ने उत्पादन कम कर दिया है।
मानसून का प्रभाव: हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण कई प्रमुख कोयला खदानों में पानी भर गया, जिससे खनन और परिवहन की गति धीमी पड़ गई।
क्या हो सकता है प्रभाव?
यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों और त्योहार के समय कई राज्यों में घोषित या अघोषित बिजली कटौती देखने को मिल सकती है। इससे न केवल आम नागरिकों के दिवाली के उत्सव पर असर पड़ेगा, बल्कि छोटे और बड़े उद्योगों का कामकाज भी प्रभावित हो सकता है।
फिलहाल, स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सरकार और ऊर्जा मंत्रालय लगातार निगरानी कर रहे हैं तथा खदानों से संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति तेज करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, दिवाली से ठीक पहले कोयले का यह संकट प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
