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राम के चढ़ावे पर ‘अपनों’ का डाका!

– ७० नहीं, सीसीटीवी में कैद हुईं १०५ संदिग्ध घटनाएं
– सुप्रीम कोर्ट में खुली मंदिर प्रबंधन की पोल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
जिस राम मंदिर के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान दिया, उसी मंदिर के चढ़ावे पर कथित रूप से हाथ साफ होता रहा। हैरानी की बात यह है कि यह खेल एक-दो बार नहीं, बल्कि १०५ बार सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर यह चौंकाने वाली जानकारी दी। पहले २७ अप्रैल से ५ जून के बीच करीब ७० संदिग्ध घटनाओं की बात सामने आई थी, लेकिन विस्तृत पड़ताल में यह संख्या बढ़कर १०५ हो गई।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी
तीन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपियों की जमानत अर्जी पांच सितंबर से विचाराधीन थी। चौथी सुनवाई याचिका को निस्तारित कर दिया गया है। जेल में बंद आठों आरोपियों की अब तक आठ बार न्यायिक अभिरक्षा बढ़ाई जा चुकी है।

कैमरों के पहरे में
राम मंदिर में चोरी!

अयोध्या स्थित राम मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधुनिक निगरानी तंत्र और जगह-जगह लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद कथित चोरी का मामला सामने आया है। एसआईटी ने फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की है। मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी की सूचना है। अदालत में पहली चार्जशीट २५ सितंबर तक दाखिल होनी है।
एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच कर संदिग्धों की पहचान की है। मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी की सूचना है और पहली चार्जशीट २५ सितंबर तक दाखिल की जानी है। अदालत ने सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर ले ली है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, चढ़ावे और कीमती वस्तुओं की रसीदें सॉफ्टवेयर से बनाई जाती हैं तथा सामग्री एसबीआई के लॉकर में रखी जाती है। सवाल यह है कि इतनी आधुनिक व्यवस्था और चारों ओर लगे कैमरों के बावजूद कथित चोरी लगातार कैसे चलती रही? निगरानी करने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे? यह केवल धन या आभूषण की कथित चोरी नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर चोट है। अब जांच संदिग्ध कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सुरक्षा, लेखा और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रत्येक अधिकारी की जवाबदेही तय होनी चाहिए। राम के नाम पर चढ़ावा लेने वालों को बताना होगा कि भगवान का घर भी सुरक्षित क्यों नहीं रहा।

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