सामना संवाददाता / नई दिल्ली
शिवसेना पार्टी और `धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज आगे की सुनवाई होगी। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा दायर की गई याचिका पर फिलहाल अंतिम सुनवाई की जा रही है। अदालत ने पिछली लगातार दो सुनवाइयों के दौरान इलेक्शन कमीशन के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसलिए आज की सुनवाई भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच की कार्यसूची में २४वें नंबर पर शिवसेना का मामला सूचीबद्ध किया गया है। शिवसेना पार्टी के नाम और `धनुष-बाण’ चिह्न शिंदे गुट को देने के केंद्रीय निर्वाचन आयोग के फैसले को शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनौती दी है। वहीं शिवसेना के चीफ व्हिप, विधायक सुनील प्रभु ने गद्दार विधायकों को अयोग्य न ठहराने वाले विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है। दोनों याचिकाओं पर शिवसेना की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और देवदत्त कामत की ओर से जोरदार बहस किए जाने के बाद, अब शिंदे गुट के वकील अपना पक्ष रख रहे हैं।
गौरतलब है कि शिवसेना पार्टी और `धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न विवाद पर सुनवाई कर रहे सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को शिंदे गुट पर सवालों की बौछार कर दी थी। कोर्ट ने राहुल नार्वेकर के फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि जिन गद्दार विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही लंबित थी, क्या उनका विधानसभा/विधानमंडल में बहुमत किसी राजनीतिक पार्टी के स्वामित्व का हक तय करने के लिए एक सुरक्षित मापदंड माना जा सकता था, क्या उस मापदंड का उचित तरीके से इस्तेमाल किया गया? साथ ही, न्यायालय ने यह सख्त टिप्पणी भी की थी कि चुनाव आयोग को किसी भी गुट को आरक्षित चिह्न का लाभ देने की आवश्यकता नहीं थी। दोनों गुटों को अलग-अलग चिह्न चुनने और बालासाहेब ठाकरे के नाम के बजाय अपने खुद के दम पर चुनाव लड़ने के निर्देश दिए जा सकते थे।
