-ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य के ईएसजेड से जुड़ा हिस्सा भी प्रभावित
सामना संवाददाता / मुंबई
नई मुंबई की ओर जाने वाले मानखुर्द मार्ग पर वाहन चालकों का स्वागत करने वाले हरित आवरण अब फ्लाईओवर परियोजना की भेंट चढ़ने की आशंका है। बृहन्मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) ने दो महत्वपूर्ण फ्लाईओवरों के निर्माण के लिए मैंग्रोव्ज सहित १.६२०२ हेक्टेयर वन भूमि डायवर्ट करने की अनुमति मांगी है। प्रस्तावित जमीन का एक हिस्सा ठाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य तथा उसके अधिसूचित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) से जुड़ा है। इससे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच टकराव एक बार फिर सामने आ गया है।
घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड और सायन-पनवेल राजमार्ग के जंक्शन पर यातायात सुगम बनाने के लिए नगर निगम ने मौजूदा मानखुर्द फ्लाईओवर के समानांतर दो नए फ्लाईओवर प्रस्तावित किए हैं। परियोजना के लिए निविदा जारी किए जाने के करीब दो साल बाद अब वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई है।
एमसीजीएम ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मांगी है। निगम के अनुसार, परियोजना के रास्ते में आने वाली तीन हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों को स्थानांतरित करना आवश्यक है। इसके लिए वन क्षेत्र का इस्तेमाल प्रस्तावित किया गया है।
निगम के दस्तावेज के मुताबिक, १.१०८८ हेक्टेयर वन भूमि, जिसकी लंबाई ८८९.१०३ मीटर है तथा ०.४७३२ हेक्टेयर अधिसूचित ईएसजेड क्षेत्र, जिसकी लंबाई ५२६.४५८ मीटर है, प्रभावित क्षेत्र में शामिल है।
पहला फ्लाईओवर मौजूदा पुल के पश्चिमी हिस्से से होकर वाहनों को घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड से सायन-पनवेल हाईवे और नई मुंबई की दिशा में जाने में मदद करेगा। दूसरा फ्लाईओवर पूर्वी हिस्से में प्रस्तावित है, जिससे नई मुंबई से आने वाले वाहन सिग्नल को बायपास कर सीधे घाटकोपर-मानखुर्द लिंक रोड की ओर जा सकेंगे।
हालांकि परियोजना का उद्देश्य यातायात दबाव कम करना बताया जा रहा है, लेकिन मैंग्रोव्ज और वन भूमि के इस्तेमाल से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब नजर केंद्रीय मंत्रालय की अनुमति और पर्यावरणीय मंजूरियों पर है। सवाल यही है कि यातायात राहत के लिए प्रस्तावित इस परियोजना में हरित क्षेत्र की कीमत कितनी चुकानी पड़ेगी?
