-रोहित माहेश्वरी लखनऊ
मायावती का ताजा बयान बीएसपी की अंदरूनी राजनीति पर कई सवाल खड़े करता है। वह परिवार से ऊपर संगठन को रखने की बात करती हैं, आकाश आनंद और उनकी बहन को जिम्मेदारी से दूर रखने की घोषणा करती हैं, लेकिन उसी बयान में भाई आनंद कुमार के बेटे ईशान आनंद को पार्टी में आगे बढ़ाने का फैसला भी करती हैं।
सवाल यह है कि यदि राजनीति में रिश्तेदारी से ऊपर उठना ही सिद्धांत है, तो नेतृत्व की तलाश बार-बार परिवार के भीतर ही क्यों होती है? आकाश के बाद ईशान का चयन इस विरोधाभास को और गहरा करता है। २३ सितंबर की बैठक में अब असली परीक्षा यही होगी कि बीएसपी परिवार-केंद्रित नेतृत्व से आगे बढ़कर संगठन के सामान्य कार्यकर्ताओं को कितना स्थान देती है।
‘लठतंत्र’ के आरोप से गरमाई सियासत, अखिलेश ने PDA के सवाल पर बीजेपी को घेरा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोधी और निषाद समाज के नेताओं एवं जनप्रतिनिधियों को लेकर भाजपा और प्रदेश सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि PDA समाज को डराने-धमकाने के लिए शक्ति का इस्तेमाल किया जा रहा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की जगह ‘लठतंत्र’ को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अखिलेश ने २०२४ के लोकसभा चुनाव के परिणामों का उल्लेख करते हुए भाजपा की राजनीति पर सवाल उठाए और कहा कि सामाजिक बंटवारे की राजनीति अब प्रभाव खो रही है। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक न्याय, समान अवसर और वंचित वर्गों की भागीदारी को अपनी राजनीतिक दिशा का आधार बताया। उनका ‘बंधुराष्ट्र’ का विचार युवाओं तथा कमजोर वर्गों को समान अवसर देने की बात करता है। हालांकि, भाजपा और उसके समर्थक अखिलेश के आरोपों से अलग राजनीतिक दृष्टिकोण रखते हैं।
