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फडणवीस के राज में…गणेश मंडल खतरे में!

-गणेशोत्सव में ‘कड़ी सुरक्षा’ का दावा खोखला
-सरेआम चाकू घोंपकर मंडल अध्यक्ष की हत्या
फिरोज खान / मुंबई
देवेंद्र फडणवीस के गृहमंत्रालय के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं। गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन घाटकोपर के कामराजनगर में हुई हत्या ने पुलिस बंदोबस्त की पोल खोल दी है। मामूली विवाद ने इतना उग्र रूप लिया कि एक गणेश मंडल के अध्यक्ष की खुलेआम चाकू से हत्या कर दी गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गणपति मंडल में मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया और सेवन स्टार स्पोर्ट्स क्लब गणपति मंडल के अध्यक्ष राजेश राजेंद्रन देवेंदर (३५) की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। इस हमले में एक अन्य व्यक्ति भी घायल हुआ है। मामले में पंतनगर पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, यह रात करीब ९:३० बजे गणपति मंडल के बाहर हुई। मंडल के १८ वर्षीय कार्यकर्ता विनय शर्मा को आरोपी रौनक बालू सोनवणे ने कथित तौर पर इस बात पर रोका कि वह उसे गुस्से से क्यों देख रहा था। इसी बात को लेकर विवाद हुआ और आरोपी ने विनय को थप्पड़ मार दिया।
विवाद बढ़ता देख मंडल अध्यक्ष राजेश देवेंदर वहां पहुंचे और मामले की वजह पूछी। आरोप है कि इसके बाद आरोपी और उसके साथियों ने राजेश पर हमला कर दिया। हमलावरों ने उनकी छाती में चाकू घोंप दिया और एक के बाद एक करके कई वार कर दिए। गंभीर रूप से घायल राजेश को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।। घटना के बाद पंतनगर पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई पुलिस की ओर से बड़े पैमाने पर बंदोबस्त किए जाने के बावजूद उत्सव क्षेत्र में इस तरह की खूनी वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। यदि गणपति मंडलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की प्रभावी निगरानी थी, फिर भी मामूली विवाद इतना बढ़ गया कि गणेश मंडल में खून खराबा हो गया।
सुरक्षा बंदोबस्त पर सवाल
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई में कड़े पुलिस बंदोबस्त के दावे किए गए थे। इसके बावजूद गणपति मंडल के बाहर हत्या की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भीड़भाड़ और उत्सव स्थलों पर पुलिस निगरानी के बावजूद विवाद का खूनी संघर्ष में बदलना चिंता का विषय बन गया है।

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