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संपादकीय : मोदी का व्यंग्यचित्र!

देवेंद्र फडणवीस की सलाह है कि राहुल गांधी को स्टैंड-अप कॉमेडियन बन जाना चाहिए। इंदौर के `छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में गांधी की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी की नकल उतारी गई। इससे भाजपा वालों को अकुलाहट भरी गुदगुदी हुई। असल में नब्बे फीसदी भाजपा वाले राहुल गांधी से खुश हैं। भाजपा के भीतर की एकतरफा (एकाधिकारवाद) को गांधी अपने हास्य से घायल कर रहे हैं। मालिक का वस्त्रहरण हो रहा है, इसलिए गुलाम खुश हैं; लेकिन मालिक की चापलूसी तो छोड़ नहीं सकते। इसलिए ‘गांधी एक बेहतरीन कॉमेडियन हैं’ जैसे तीखे शब्दों में वे हमला कर रहे हैं। फडणवीस जैसा कह रहे हैं, यदि राहुल गांधी ने स्टैंड-अप कॉमेडियन का पेशा अपना लिया, तो नरेंद्र मोदी का क्या होगा, उनके पास क्या काम बचेगा, वे और उनके ‘जोकर्स’ अंधभक्त बेरोजगार हो जाएंगे, इस बात पर फडणवीस और उनके लोगों ने विचार किया ही होगा। मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति को मिट्टी में मिला दिया। वैश्विक नेताओं से मिलने जाते हैं, तो उनके गले लगकर इतनी कसकर झप्पी मारते हैं कि उन विदेशी नेताओं का दम घुटने लगता है। हाथ मिलाते हैं, तो इतनी जोर से हाथ दबाते हैं कि मेहमान के चेहरे की पीड़ा साफ दिखाई देती है। अंतर्राष्ट्रीय शिष्टाचार को यह शोभा नहीं देता। देश में विपक्ष का गला घोंटना और वैश्विक मंच पर नेताओं की सांसें रुकने तक कसकर गले लगाना, इस ‘मोदी’ पैटर्न का प्रदर्शन जब गांधी और उनके साथी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में करते हैं, तो हजारों छात्र इसका ‘मजा’ लेते हैं। भारत को कितने अर्धशिक्षित प्रधानमंत्री मिले हैं और इसके चलते
दुनिया में हमारी हंसी
वैâसे उड़ रही है, यह उसी का प्रदर्शन है। फडणवीस जैसे लोगों को यह पसंद नहीं आता और उनका राहुल गांधी को कॉमेडियन कहना ‘हास्य’ रस का अपमान है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की पेशे से कॉमेडियन हैं और मोदी उन्हें दोस्त मानते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने तो ‘कॉमेडी’ का शिखर छू लिया है। उनकी बंदरछाप उछल-कूद और बर्ताव ऐसा है कि हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएं। राष्ट्रपति ट्रंप के हास्य के प्रधानमंत्री मोदी भी प्रशंसक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप की कॉमेडी का प्रभाव मोदी पर है और वह उनके व्यवहार में दिखता है। संसद में उनका भाषण एक ‘मिमिक्री’ या कॉमेडी होता है। अजीब अंग-विक्षेप, हाव-भाव, आंख मिचमिचाना, तालियां बजाना, विचित्र आवाजें निकालना, नेहरू और गांधी का उपहास उड़ाना, अपने जन्मदिन पर दीये जलवाना, उसके लिए तेल की आपूर्ति करना और ऊपर से जनता को ही ‘तेल बचाओ’ का संदेश देना, जनता से कहना कि विदेश दौरे टालो और खुद तुरंत पांच-छह देशों की यात्रा के लिए विमान में सवार हो जाना, कभी रोना, कभी विकराल हंसना, कभी ढोल बजाना, तो कभी नृत्य करना, यह सब ‘कॉमेडी’ के दायरे में ही आता है। इस कॉमेडी की दाद देने के लिए उन्होंने अंधभक्त श्रोतावृंद तैयार किया है। मोदी के कॉमेडी शो की टिकट खिड़की की जिम्मेदारी फडणवीस पर है, लेकिन फिलहाल इस टिकट खिड़की पर सन्नाटा पसरा है और राहुल गांधी के सभी ‘शो’ हाउसफुल चल रहे हैं। इसलिए फडणवीस की चिड़चिड़ाहट को समझा जाना चाहिए। भारत में गांधी की प्रतिमा पर गोली चलाने वालों को संरक्षण प्राप्त है, लेकिन प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करने की
आजादी नहीं है, यह अजीब
बात है। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री पूरे संसद सत्र के दौरान सदन में दिखाई नहीं देते, यह लोकतंत्र की ‘मिमिक्री’ है, ऐसा फडणवीस जैसे लोगों को नहीं लगता; लेकिन राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर हास्यात्मक टिप्पणी क्या कर दी, सभी की छाती पर सांप लोटने लगे। आज प्रधानमंत्री मोदी की नकल उतारी गई, तो भाजपा वाले तांडव कर रहे हैं; लेकिन डॉ. मनमोहन सिंह जब प्रधानमंत्री थे, तब इन्हीं लोगों ने उनका क्या कम उपहास उड़ाया था? ‘मौनी बाबा’, ‘नीतिगत लकवा’ जैसे विशेषण लगाकर उनका मजाक उड़ाने वाले यही लोग थे। तब क्या वह डॉ. मनमोहन सिंह और प्रधानमंत्री पद का अपमान नहीं था? प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में राहुल गांधी को ‘असंस्कारी नाराज फूफा’ कहा, तब नेता प्रतिपक्ष का अपमान ही हुआ; लेकिन आपकी जोकरगीरी को लोग सिर-आंखों पर बिठाएं और दूसरा कोई थोड़ा-सा मजाक कर ले, तो उसे मूर्ख करार दे दिया जाए। अब इनकी अगली कारस्तानी देखिए। इंदौर के ‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी के साथ मिमिक्री में शामिल हुए पुलकित मणी के अगले दिन के ‘कॉमेडियन शो’ रद्द कराने के लिए मजबूर किया गया। यह हमारे देश में अभिव्यक्ति की आजादी है। राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों पर नरेंद्र मोदी का वस्त्रहरण कर रहे हैं। मोदी के नेतृत्व में देश सभी क्षेत्रों में गड्ढे में जा रहा है और मोदी केवल नेताओं को कसकर गले लगाने के अंतर्राष्ट्रीय जलसे आयोजित कर रहे हैं, इसका एक व्यंग्यचित्र सार्वजनिक मंच पर राहुल गांधी ने उकेरा। देवेंद्र फडणवीस ने इस व्यंग्यचित्र को देश का अपमान बताया। मोदी का मतलब देश है, यह फडणवीस को किसने बताया?

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