मुख्यपृष्ठस्तंभपटना की पॉलिटिक्स : बिहार में फिर ‘एके-४७’ की गूंज!

पटना की पॉलिटिक्स : बिहार में फिर ‘एके-४७’ की गूंज!

-अरुण कुमार गुप्ता

बिहार की सियासत में चुनावी गर्मी के साथ जेडीयू का पुराना विवाद भी फिर उबल पड़ा है। पार्टी विधायक अनंत सिंह और जेडीयू नेता नीरज कुमार के बीच वर्षों पुरानी राजनीतिक अदावत अब एक बार फिर सार्वजनिक बहस का रूप ले चुकी है। अनंत सिंह ने पुराने एके-४७ मामले को लेकर नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें नार्को टेस्ट की चुनौती दी। नीरज कुमार ने इन आरोपों को खारिज किया है। अनंत सिंह का आरोप है कि उन्हें पुराने एके-४७ मामले में फंसाने की कोशिश की गई थी और इसके लिए नीरज कुमार की भूमिका पर सवाल उठते हैं। दूसरी तरफ नीरज कुमार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। यानी दोनों नेताओं के दावे एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं।
नार्को टेस्ट तक पहुंची बात
अनंत सिंह की ओर से नार्को टेस्ट की चुनौती ने विवाद को राजनीतिक बयानबाजी से आगे चर्चा के नए स्तर पर पहुंचा दिया है। हालांकि, किसी नेता का आरोप या नार्को टेस्ट की मांग अपने आप में किसी अपराध या आरोप की पुष्टि नहीं करती। मामले में न्यायिक रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच को ही निर्णायक माना जा सकता है।
एमएलसी चुनाव ने बढ़ाई सियासी तपिश
एमएलसी चुनाव के बीच अपनी ही पार्टी के दो नेताओं का इस तरह आमने-सामने आना जेडीयू के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। पार्टी नेतृत्व की ओर से एकजुटता का संदेश दिया जा रहा है, लेकिन अनंत सिंह की सार्वजनिक चुनौती ने संगठन के भीतर पुराने मतभेदों की चर्चा फिर तेज कर दी है।

अपनी ही सरकार पर
बीजेपी विधायक का बारूद!
बिहार की सियासत में विपक्ष के हमले तो आम हैं, लेकिन जब सत्ता पक्ष का अपना विधायक ही सरकार की नीतियों पर सवालों की बौछार कर दे, तो मामला चर्चा में आ जाता है। भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री विनय बिहारी ने अपनी ही सरकार को लेकर खुलकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव के दौरान पैसे बांटे जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब विकास के लिए कर्ज का सहारा लिया जा रहा है। ये आरोप विनय बिहारी ने लगाए हैं। बक्सर में बोलते हुए विनय बिहारी ने भोजपुरी अंदाज में सरकार से सवाल किया ‘केतना कर्जा खइबअ ए राजा, कर्जा खा के विकास कईसे करबअ?’ उन्होंने कहा कि अगर विकास के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है तो कर्ज के सहारे आगे बढ़ना चिंता का विषय है। विधायक ने चुनाव के दौरान कथित तौर पर दस-दस हजार रुपए बांटे जाने का भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि जब वे विकास कर रहे थे और उसका असर दिख रहा था, तब चुनाव के समय इस तरह पैसे भेजने की जरूरत क्यों पड़ी।
सम्राट की सफाई!
अगर नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री की कुर्सी अपनी मर्जी से छोड़ी थी, तो उनके पद छोड़ने के पीछे आखिर राजनीतिक वजह क्या थी? क्या यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन था या बिहार की सत्ता के समीकरण में कोई बड़ा बदलाव? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बयान के बाद यही सवाल एक बार फिर बिहार की सियासत में चर्चा के केंद्र में आ गया है। सम्राट चौधरी ने साफ कहा कि नीतीश कुमार ने अपनी इच्छा से मुख्यमंत्री पद छोड़ा और भाजपा की ओर से उन पर कोई दबाव नहीं था। सम्राट चौधरी के मुताबिक, नीतीश कुमार ने स्वयं मुख्यमंत्री पद से हटने का पैâसला लिया। सम्राट ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार अब राज्यसभा सदस्य के रूप में अपने अनुभव से सरकार को मार्गदर्शन दे रहे हैं। राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद सफाई देना असामान्य नहीं है, लेकिन इस बयान ने बहस को फिर उसी सवाल पर ला खड़ा किया है। नीतीश ने आखिर मुख्यमंत्री की कुर्सी क्यों छोड़ी? इसका स्पष्ट राजनीतिक कारण क्या था? सम्राट चौधरी के बयान में दबाव से इनकार है, लेकिन पद छोड़ने की विस्तृत वजह पर राजनीतिक चर्चा जारी है।

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