-फिरोज खान
-कक्षा में पढ़ाई की जगह अश्लील वीडियो, स्कूलों में बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
जिस स्कूल को बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखने की जगह माना जाता है, वहीं अगर मासूम बच्चियों को कथित तौर पर अश्लील वीडियो दिखाए जाएं और उनके साथ ‘बैड टच’ किया जाए, तो यह सिर्फ एक शिक्षक के अपराध का मामला नहीं रह जाता, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। वाशिम जिले के जिला परिषद स्कूल में सामने आया मामला इसी चिंता को और गहरा करता है। पुलिस के अनुसार, ५६ वर्षीय शिक्षक पर कक्षा तीसरी और चौथी की करीब १४ छात्राओं के साथ पिछले छह से आठ महीनों के दौरान कथित रूप से अश्लील हरकतें करने का आरोप है। आरोप है कि वह बच्चियों को अश्लील वीडियो दिखाता था और विरोध करने पर उन्हें धमकाता था। बच्चियों ने ‘गुड टच-बैड टच’ की जानकारी मिलने के बाद महिला शिक्षक को आपबीती बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
छह महीने तक क्यों
नहीं जागी व्यवस्था?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर बच्चियों के साथ लगातार ऐसी हरकतें होती रहीं, तो स्कूल प्रशासन और संबंधित शिक्षा व्यवस्था को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? स्कूलों में सीसीटीवी, शिकायत व्यवस्था, महिला शिक्षकों की निगरानी और बाल सुरक्षा नियमों का पालन कितना प्रभावी है, इसकी जांच जरूरी है। बच्चियों की सुरक्षा केवल स्कूल के गेट पर पुलिस तैनात करने से सुनिश्चित नहीं होगी। शिक्षकों की नियुक्ति से पहले कड़े सत्यापन, नियमित व्यावहारिक प्रशिक्षण, बाल सुरक्षा समितियों की सक्रियता और शिकायतों की गोपनीय व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।
हर एक स्कूल की व्यवस्था बदलनी होगी
प्रत्येक स्कूल में बच्चियों के लिए स्वतंत्र शिकायत पेटी और हेल्पलाइन की जानकारी, महिला शिक्षक /काउंसलर की उपलब्धता, शिक्षकों का नियमित पुलिस वेरिफिकेशन, स्कूलों में बाल-सुरक्षा ऑडिट और शिकायत मिलते ही अनिवार्य रिपोर्टिंग की व्यवस्था हो। अभिभावकों को भी बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ और बिना डर अपनी बात बताने के लिए लगातार जागरूक करना होगा। मासूमों की सुरक्षा में छोटी-सी चूक भी उनकी पूरी जिंदगी पर असर डाल सकती है। इसलिए स्कूल प्रशासन और सरकार को ‘सुरक्षा पहले, बाकी सब बाद में’ के सिद्धांत पर व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
