-अरुण कुमार गुप्ता
बिहार में विकास के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी अगर सड़क और पुल कुछ ही दिनों में दरकने लगें तो सवाल उठना लाजिमी है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में करीब १३ करोड़ रुपए की लागत से बने मजुरहा-हरदिया पुल की एप्रोच रोड में उद्घाटन के महज करीब २० दिन बाद लंबी दरार और धंसाव की खबर ने निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मजुरहा-हरदिया के बीच बेरुआ घाट पर बने पुल का उद्घाटन १ सितंबर २०२६ को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया था। करीब ७२ मीटर लंबे और ७.५ मीटर चौड़े पुल को इलाके की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एप्रोच रोड पर करीब २० फीट लंबी दरार सामने आने और सड़क के हिस्से के धंसने की खबर ने परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है।
गांव की कमाई पर सम्राट की नजर!
टैक्स? ईंट-भट्ठे से कितना? निजी स्कूलों से कितना? और फिर वह पैसा गया कहां? गांव की जनता के सामने यह पूरा हिसाब सार्वजनिक होना जरूरी होगा। वरना कमाई बढ़ाने का दावा तो होगा, लेकिन गांव के विकास की तस्वीर वही रह जाएगी। पंचायतों की आर्थिक ताकत बढ़ाने का प्रस्ताव ग्रामीण शासन को सीधे राजनीतिक बहस के केंद्र में लाता है। गांव की सरकार मजबूत होगी तो गांव की जनता भी मजबूत सवाल पूछेगी।
सम्राट कब तक रहेंगे मुख्यमंत्री?
बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व को लेकर नई चर्चा छिड़ गई है। उपेंद्र कुशवाहा की मुख्यमंत्री पद से जुड़ी टिप्पणी के बाद सवाल उठने लगा है। सम्राट चौधरी कब तक मुख्यमंत्री रहेंगे? कुशवाहा की टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब बिहार की राजनीति में सत्ता के समीकरणों पर लगातार नजर बनी हुई है। मुख्यमंत्री के लिए चुनौती सिर्फ कुर्सी संभालने की नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज और गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर भी है। रोजगार, महंगाई, बाढ़, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे सरकार के सामने हैं। ऐसे में नेतृत्व को लेकर उठती राजनीतिक चर्चाओं के बीच सरकार का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सवाल उठते रहेंगे। लेकिन जनता के लिए बड़ा सवाल यही है कि सरकार किसके नेतृत्व में चलेगी, इससे आगे रोजगार कब मिलेगा? महंगाई से राहत कब मिलेगी? बाढ़ का स्थायी समाधान कब होगा? गांव की सड़क और स्कूल कब सुधरेंगे?
हीरोइन को देखने की ऐसी दीवानगी!
बिहार शरीफ में भोजपुरी अभिनेत्री काजल राघवानी को देखने के लिए उमड़ी भीड़ का उत्साह उस समय हंगामे में बदल गया, जब कार्यक्रम खत्म होने के बाद प्रशंसक उनकी कार के पीछे दौड़ पड़े। देखते ही देखते भीड़ ने कार को चारों तरफ से घेर लिया। अफरा-तफरी के बीच कार के शीशे भी टूट गए। बताया जा रहा है कि अभिनेत्री एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बिहार शरीफ पहुंची थीं। कार्यक्रम के दौरान उन्हें देखने और उनके साथ तस्वीर लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जैसे ही अभिनेत्री कार से रवाना हुई, प्रशंसकों की भीड़ भी उनके पीछे चल पड़ी। कुछ ही देर में स्थिति ऐसी हो गई कि कार के आगे-पीछे लोगों का हुजूम जमा हो गया। घटना के बाद कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर इतनी बड़ी भीड़ के बीच अभिनेत्री की कार को सुरक्षित रास्ता क्यों नहीं मिल पाया? क्या आयोजकों ने कार्यक्रम खत्म होने के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की थी? प्रशंसकों का उत्साह आखिर ऐसी स्थिति तक कैसे पहुंच गया कि कार के शीशे तक टूट गए?
