– बैंकिंग व्यवस्था की अतिरिक्त नकदी `११.१६ लाख करोड़ से घटकर `४.९२ लाख करोड़;
– महंगे तेल और कमजोर रुपए के बीच सख्त संकेत
सामना संवाददाता / मुंबई
भारतीय रिजर्व बैंक ने बिना रेपो दर बढ़ाए बैंकिंग व्यवस्था में बह रही अतिरिक्त नकदी पर तेजी से अंकुश लगाया है। प्रणालीगत नकदी अधिशेष रिकॉर्ड `११.१६ लाख करोड़ से ५५ प्रतिशत घटकर `४.९२ लाख करोड़ रह गया। यानी करीब `६.२४ लाख करोड़ की अतिरिक्त तरलता कम हुई है।
आरबीआई ने नकदी सोखने के लिए खुले बाजार में सरकारी बॉन्ड बेचे, विदेशी मुद्रा स्वैप किए और बैंकों से रिवर्स रेपो के माध्यम से धन जमा कराया। पिछले सप्ताह `७५,००० करोड़ के बॉन्ड बेचे गए और `२५,००० करोड़ की अतिरिक्त बिक्री की योजना है। बैंकों ने लगभग `३.४ लाख करोड़ रिवर्स रेपो में रखे। महंगे कच्चे तेल, डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये और संभावित मुद्रास्फीति के बीच अतिरिक्त नकदी घटाना आरबीआई की मौद्रिक सख्ती का संकेत माना जा रहा है। ज्यादा नकदी बाजार दरों को रेपो दर से नीचे रख सकती है और महंगाई का दबाव बढ़ा सकती है।
आपकी ईएमआई पर क्या असर?
अभी आरबीआई ने नई रेपो-दर वृद्धि घोषित नहीं की है, इसलिए मकान अथवा वाहन ऋण की ईएमआई तत्काल बढ़ना तय नहीं है। लेकिन नकदी और घटने तथा भविष्य में ब्याज दर बढ़ने पर नए ऋण महंगे, फ्लोटिंग-रेट ईएमआई अधिक और सावधि जमा दरें आकर्षक हो सकती हैं।
