मुख्यपृष्ठसंपादकीयसंपादकीय : भाजपा के गजनियों ने राम मंदिर १०५ बार लूटा!

संपादकीय : भाजपा के गजनियों ने राम मंदिर १०५ बार लूटा!

राम मंदिर लूट का मुद्दा विपक्ष ने मजबूती से उठाया। शिवसेना ने तो ‘रामरक्षा’ आंदोलन चलाकर भक्तों को जागरूक किया। तब विपक्ष पर हिंदुत्व को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने शंख फूंका। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तो उससे भी आगे बढ़कर बोले, ‘विपक्ष झूठ बोल रहा है। राम मंदिर में कोई चोरी नहीं हुई है। जो नहीं राम का, वह किस काम का?’ जैसी बातें बनाकर इस मंडली ने चोरी पर पर्दा डालने की कोशिश की। लेकिन ये सारे राम दरबार के पाखंडी लोग बेनकाब हो चुके हैं। राम मंदिर में ‘दान’ चोरी के मामले की जांच के संबंध में ‘एसआईटी’ ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय में विस्तृत जानकारी पेश की। उसमें राम मंदिर में १०५ बार दान-चोरी होने की बात साफ तौर पर कही गई है। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा यह जानकारी प्रस्तुत किए जाने से, ‘चोरी का आरोप हिंदुत्व विरोधियों की साजिश है’ कहने वालों के मुंह पर जोरदार तमाचा पड़ा है। १०५ बार दानपात्र लूटे गए और ये लुटेरे भाजपा खेमे के हिंदुत्ववादी हैं। उन पर अयोध्या के राम मंदिर की दानपेटी की रक्षा की जिम्मेदारी थी, लेकिन हिंदुत्व के चौकीदार ही चोर निकले हैं। इस मामले में दस से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई। चोरी का सामान जब्त हुआ, पंचनामा हुआ, फिर भी वकालत की डिग्री रखने वाले देवेंद्र फडणवीस जैसे लोग
धड़ल्ले से झूठ
बोलते हैं कि, ‘चोरी नहीं हुई है। विपक्ष राम मंदिर को बदनाम कर रहा है।’ श्रीमान फडणवीस, आपको एक बात ध्यान में रखनी चाहिए। अगर विपक्ष ने इस चोरी का भंडाफोड़ न किया होता और इस पर संसद न सिर पर उठा ली होती, तो चोरी का यह सिलसिला यूं ही जारी रहता। इतना ही नहीं, जो चोरी अभी १०५ बार हुई है, वह एक लाख बार हुई होती। एक दिन राम के सात-बारा (भूमि अभिलेख) से अयोध्या ही गायब करके भाजपा खेमे के किसी उद्योगपति को बेच दी जाती। अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट ने बड़े पैमाने पर जमीनों का भी घोटाला किया और उसके लाभार्थी ‘मुफ्तखोर’ भाजपा परिवार के ही लोग हैं। मंदिर परिसर की जमीनें हड़पकर सस्ते में खरीदी गर्इं। अगले चौबीस घंटों में वही जमीनें मंदिर ट्रस्ट को करोड़ों में बेच दी गर्इं। यह ‘रियासतदारी’ राम के नाम पर चलाई गई। इसमें बड़े-बड़ों के हाथ सने हैं। हिंदुत्व के नाम पर हुआ यह सौदा सरासर बेशर्मी है। राम मंदिर निर्माण के लिए सैकड़ों कारसेवकों ने, साधु-संतों ने खून बहाया, बलिदान दिया। बाबरी ढहाए जाने के समय भाजपा के लोग भाग खड़े हुए थे, उन्होंने कारसेवकों को लावारिस छोड़ दिया था। आज वही लोग राम मंदिर की तिजोरी की चाबियां अपनी धोती में बांधकर घूम रहे हैं। उन्होंने ही मंदिर को लूटा, पैसे चुराए, राम और सीता के आभूषण चुराए, दान-चढ़ावे के हिसाब-किताब में हेरा-फेरी की। राम मंदिर के मामले में अगर यह डवैâती बेखौफ चल रही है, तो देश की
सार्वजनिक संपत्ति की
क्या हालत होगी? जिन्होंने राम मंदिर की दानपेटी तक को नहीं छोड़ा, वे देश की सार्वजनिक संपत्ति की किस तरह लूट-खसोट कर रहे हैं, यह रोज ही दिख रहा है। अयोध्या अब केवल धार्मिक, आध्यात्मिक केंद्र नहीं रहा, बल्कि उसे ‘व्यापारिक’ केंद्र बना दिया गया है। फिल्म कलाकारों और भाजपा का भजन करने वाले व्यापारी लोगों को सरयू के किनारे भूखंड बांटे गए हैं। उसी सरयू नदी में गोलीबारी में घायल हुए कारसेवकों को जिंदा फेंक दिया गया था। उनके खून से सरयू लाल हो गई थी। आज भाजपा यह सब भूल चुकी है। अयोध्या और वहां का राम मंदिर अब उनके लिए महज ‘आर्थिक कारोबार का केंद्र’ बन चुका है। इसीलिए राम मंदिर में हुई चोरी का दर्द उनके दिल में नहीं चुभा और चोरी का जवाब मांगने वालों को ‘रामद्रोही’ करार देने की निर्लज्ज कोशिश की गई। अयोध्या के राम मंदिर में हुई यह लूटमार राष्ट्रीय अस्मिता पर लगा एक कलंक है। इस पर चर्चा होनी चाहिए, विपक्षी सांसदों की इस मांग को सत्ताधारियों ने ठुकरा दिया। उन्होंने मंदिर में हुई चोरी के मुद्दे पर संसद नहीं चलने दी। राम मंदिर की चोरी पर चर्चा से भागना ही सबसे बड़ा रामद्रोह है। भाजपा और उसके कुनबे ने यही रामद्रोह किया है। १०५ बार अयोध्या के राम मंदिर को लूटा गया। महमूद गजनवी ने भी इतनी बार हिंदुओं के मंदिरों को नहीं लूटा था। हिंदुत्व का तिलक लगाकर जो लोग सत्ता में आए, उन्होंने अयोध्या में शहीद हुए कारसेवकों के खून का सौदा किया। इसके अलावा और क्या कहा जाए?

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