– नवीन सी. चतुर्वेदी
पीड़ा को सह कर देखोगे तो समझोगे
ज्वाला में दह कर देखोगे तो समझोगे
मिट्टी का मिट्टी में मिलना क्या होता है
परबत बन ढह कर देखोगे तो समझोगे
लुटिया में किस भाँति समा जाता था सागर
कुटिया में रह कर देखोगे तो समझोगे
मन करता है तैरते जाओ तैरते जाओ
करुणा में बह कर देखोगे तो समझोगे
उर्दू में गजलें कहना फिर भी आसाँ है
हिंदी में कह कर देखोगे तो समझोगे
