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2027 के विधानसभा चुनाव में मनोवैज्ञानिक बढ़त देगी राज्यसभा चुनाव क्रॉस वोटिंग!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ

राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से दो की जगह तीन प्रत्याशी उतारने की रणनीति ने सत्ताधारी भाजपा को भी असहज स्थिति में पहुंचा दिया है। पिछले राज्यसभा चुनाव के समय समाजवादी पार्टी में क्रॉस वोटिंग हुई थी। सपा मुखिया अखिलेश यादव इस बार तीसरे प्रत्याशी का ऐलान करके भाजपा को मनोवैज्ञानिक तनाव दे दिया। तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिये अखिलेश यादव के प्रत्याशी को लगभग 12 विधायकों के एक नम्बर के वोट की जरूरत पड़ेगी। जो बहुत कठिन लक्ष्य है, लेकिन जानकारों का कहना है कि अखिलेश यादव का तीसरा प्रत्याशी यदि भारतीय जनता पार्टी के चार विधायकों का भी क्रॉस वोटिंग करवाने में सफल हो गया तो विधानसभा चुनाव 2027 के रणनीति की दृष्टि से यह भाजपा के लिये अच्छा संदेश नहीं होगा। अखिलेश यादव तीसरा सीट जीतने से ज्यादा कुछ खास राजनैतिक संदेश देने के लिये लड़वा रहे हैं। भाजपा या उसके सहयोगी दलों में क्रॉस वोटिंग हुई तो अखिलेश यादव को भाजपा पर हमला तेज करने का अवसर मिल जायेगा। अखिलेश यादव अपना शिकार भाजपा और उसके सहयोगी दलों में टिकट कटने के डर से परेशान विधायकों को खोज रहे हैं। जो लोग विभिन्न दलों से दल बदल कर भाजपा में आकर विधायक बने हैं वह निशाने पर हैं। अखिलेश यादव तीसरा प्रत्याशी लड़ाने का ऐलान करके प्रत्याशी का नाम अभी गोपनीय रखे हैं।जबकि भाजपा में प्रदेश लेबल की कोर कमेटी की बैठक की सूची कुछ ही मिनट में अखिलेश यादव के हाथ मे पहुंच गयी थी। यह भाजपा के लिये बहुत शर्मनाक घटना है।

403 विधानसभा वाले सदन में वर्तमान समय 397 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता 38 वोटों की जरूरत होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास कुल 292 विधायक हैं और सपा गठबंधन के पास 103 विधायक हैं। एनडीए में बीजेपी के 256, अपना दल (एस) के 13, आरएलडी के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। दो विधायक राजा भैया की पार्टी के हैं। इन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 291 विधायकों का होता है। सपा के 101 और कांग्रेस 2 को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं। राज्यसभा की एक सीट के लिए 38 विधायकों की जरूरत के आधार पर बीजेपी को सात सीटें जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे, जिसके बाद उसके पास 26 सरप्लस (अतिरिक्त) वोट बचेंगे। बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। राज्यसभा की 2 सीटों को जिताने के लिए सपा को 76 वोटों की जरूरत है, सपा के पास भी करीब 27 सरप्लस वोट बचते हैं। सपा को तीसरी सीट जीतने के लिए 11 अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। 11-12 वोटों का यही अंतर चुनाव को कांटे की टक्कर बना रहा है।

अखिलेश यादव ने 3 प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर ‘सरप्राइज’ देने की बात कही है और बीजेपी के सहयोगी दलों (जैसे सुभासपा या निषाद पार्टी) में सेंधमारी की उम्मीद लगा रहे हैं। दूसरी ओर बीजेपी भी शांत नहीं बैठी है। सपा द्वारा राज्यसभा के तीन प्रत्याशी उतारने की रणनीति का खुलासा होते ही बीजेपी ने चाक चौबंद के साथ 8 राज्यसभा उम्मीदवार उतारने का प्लान बनाया है। बीजेपी को आठवीं सीट जीतने के लिए 12 अतिरिक्त वोट चाहिए होंगे। 8वीं सीट जीतने के लिए सपा से निष्कासित और बागी विधायकों पर भाजपा के रणनीतिकार आंख गड़ाये बैठे हैं। बीजेपी के साथ सपा के बागी विधायक आ सकते हैं, जिन्हें मिलाकर यह आंकड़ा 32 पर पहुंच जाएगा। इसके बाद भी उसे 6 वोट चाहिए होंगे, लेकिन बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सहयोगी दलों के विधायकों को एकजुट रखने की है। अखिलेश यादव की नजर भाजपा के सहयोगी दलों भासपा और आरएलडी के कुछ विधायकों पर है। सुभासपा के 6 में से 4 विधायक पहले से ही सपा का झंडा लगाकर घूम रहे हैं। इसके अलावा आरएलडी के 9 में से 3 विधायक सपा बैकग्राउंड वाले हैं। इसीलिए सपा ने अपनी तीसरी सीट जीतने का नंबर जुटाने का दांव तैयार कर रखा है, जिसके लिए ही अखिलेश यादव सरप्राइज का दांव चल रहे हैं। बीजेपी राज्यसभा के लिए 8वां उम्मीदवार ऐसे नेता को बनाना चाहती है, जो सपा के सियासी गणित को बिगाड़ सके। सपा भी ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो पीडीए समीकरण को मजबूत बनाए रखते हुए राज्यसभा चुनाव में जीत का परचम फहरा सके। क्रॉस वोटिंग के बल पर सपा और बीजेपी के बीच जीत-हार की लड़ाई का विगुल बज गया है।

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