मुख्यपृष्ठविश्वमुस्लिम वर्ल्ड : अमेरिका के जाने से झूम उठे इराकी!

मुस्लिम वर्ल्ड : अमेरिका के जाने से झूम उठे इराकी!

-सूफी खान

-ईरान ने कह दी बड़ी बात
२३ साल बाद मिली आजादी का जश्न, हर तरफ खुशियां, सड़कों पर गाड़ियां और इराक का परचम। हश्दुश्शाबी का परचम रजिस्टेंस के परचम। जी हां, इराक में जश्न है अमेरिका के इराक से फाइनली बाहर निकलने का। ३० सितंबर को अमेरिका इराक से २३ साल बाद बोरिया बिस्तर समेटकर निकल गया। मीडिया रिपोर्ट खासकर वेस्टर्न मीडिया तो यही दावा कर रहा है कि आखिरी अमेरिकन ट्रूप भी इराक की धरती छोड़ चुका है। पहले सद्दाम हुसैन को खत्म करने और दोबारा आईएसआईएस से लड़ने के बहाने अमेरिका ने इराक में ठिकाना बनाया था। कई एयरबेस बनाए और इराक का तेल आज भी अमेरिका की मर्जी से बिकता है और उसका पैसा पहले अमेरिका जाता है फिर वहां से इराक को खर्चा दिया जाता है। लेकिन ३० सितंबर को अमेरिकी फौजें और साजो सामान इराक से निकल गया।
उसके बाद तो इराक में ऐसा जश्न हैं, ऐसी खुशियां हैं कि क्या कहने। इराक से आ रहे वीडियो और तस्वीरें इसकी तस्दीक करते हैं। इराक में सरकार ने ४ दिनों की छुट्टी का एलान कर दिया है, ताकि अमेरिका के कदम बाहर निकलने की इराकी जनता खूब खुशियां मना सके। लोग सड़कों पर उतर आए और अपने मुल्क की अमेरिका से आजादी को सेलिब्रेट कर रहे हैं।
इस बीच इराक के पड़ोसी ईरान में एलीट फोर्स आईआरजीसी ने भी इराक के लोगों को मुबारकबाद पेश की है। आईआरजीसी का बयान जो ईरानी मीडिया में प्रसारित किया गया है, उसमें कहा गया है कि इराक से अमेरिकियों का निकलना वेस्ट एशिया की शैतान के मुक्ति का पैगाम है। उन्होंने कहा जैसे बैल अपनी गर्दन पर जुए को ढोता है, वैसे ही यहां के लोग अमेरिका को ढोते है अब इराक के गर्दन से वो जुआ निकल गया। इराक से अमेरिका के जाने के बाद क्या होगा? इस सवाल के जवाब पर एक्सपर्ट कहते हैं कि अमेरिकी बेस और फौजें वहां इसलिए थीं कि ईरानी रजिस्टेंस को कमजोर किया जा सके, लेकिन अगर इराक में अमेरिका कमजोर पड़ गया है और सामान समेट रहा है तो इसका अर्थ ये हुआ कि ईरान समर्थित फोर्सेस मजबूत होंगी। इराक में दूसरा ग्रुप जिसे अमेरिका सपोर्ट करता था वो हैं कुर्द लड़ाके। इराक के कुर्दिस्तान इलाके में इनकी पकड़ रही है। अब अमेरिका के जाने से कुर्द भी कमजोर पड़ेंगे या फिर उन्हे अपना ट्रेक बदलकर ईरान हिमायती रजिस्टेंस के साथ इराक में पटरी बैठाना पड़ेगा। अमेरिका कुर्दों पर दबाव भी डालता रहा है कि रजिस्टेंस या मुकावमत पर हमला करो, लेकिन वो समझ रहे हैं कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो खुद नाबूद हो जाएंगे। वो भी अमेरिका के इस प्रेशर को डील कर रहे थे। अमेरिका के जाने के बाद हो सकता है कुर्द भी थोड़ा-थोड़ा करके इराकी रजिस्टेंस के साथ सहयोग शुरू कर दें। हालांकि, कहा जाता है कि ये इजरायल से भी जुड़े हुए हैं इसलिए ईरानी रजिस्टेंस के लिए खतरा भी बन सकते हैं।

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