मुख्यपृष्ठखबरेंपटना की पॉलिटिक्स : सम्राट सरकार में ‘बगावत’ का अलार्म!

पटना की पॉलिटिक्स : सम्राट सरकार में ‘बगावत’ का अलार्म!

-अरुण कुमार गुप्ता

बिहार में बाढ़ का पानी उतरा नहीं, लेकिन सियासत में हलचल जरूर तेज हो गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर विपक्ष से ज्यादा अब अपने ही खेमे के नेता सवाल उठा रहे हैं। पश्चिम चंपारण में भाजपा विधायक विनय बिहारी का प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठना इसी का संकेत माना जा रहा है। विधायक ने गमछा बिछाकर धरना दिया और मुख्यमंत्री के आने तक नहीं उठने की बात कही। सवाल उठता है कि क्या सरकार के भीतर अब शिकायतें बंद कमरों से निकलकर सड़क तक पहुंचने लगी हैं? विनय बिहारी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने लौरिया विधानसभा क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित घोषित करने, नाव, राहत सामग्री, सामुदायिक रसोई और पशुचारे की व्यवस्था जैसी मांगें रखीं। विधायक ने प्रशासन पर भरोसा नहीं होने की बात भी कही। यह राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। क्योंकि सवाल उठाने वाला कोई विपक्षी विधायक नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा का विधायक है। सत्ता पक्ष के विधायक का अपनी ही सरकार के प्रशासन के खिलाफ सार्वजनिक धरना यह जरूर बताता है कि जमीनी स्तर पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच असंतोष की स्थिति है। अगर विधायक को अपनी मांगों के लिए धरने का रास्ता चुनना पड़े, तो सवाल सिर्फ बाढ़ राहत का नहीं रह जाता। मुख्यमंत्री के पश्चिमी चंपारण दौरे के बीच तटबंधों को मजबूत करने की घोषणाएं भी सामने आर्इं। लेकिन भाजपा विधायक का यह तेवर सरकार के लिए एक राजनीतिक संदेश जरूर छोड़ गया है। सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधि अगर जनता की शिकायत लेकर खुद सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने लगें, तो सरकार तक जनता की आवाज पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बिहार में छेड़छाड़ रोकेंगे
वॉटर कैनन और वङ्का वाहन!
बिहार में बेटियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर सरकार के अपने सहयोगी सवाल उठा रहे हैं और इसी बीच सम्राट चौधरी सरकार ने कानून-व्यवस्था के लिए ३० वॉटर कैनन और ८६ वङ्का वाहन खरीदने पर ६२.५२ करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी। सवाल यह नहीं कि पुलिस को भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक वाहन क्यों चाहिए, सवाल यह है कि जब लड़कियों के साथ सड़क, बाजार और सार्वजनिक जगहों पर छेड़छाड़ के मामले सामने आ रहे हैं, तब इन ११६ वाहनों से उनकी सुरक्षा कैसे बढ़ेगी? कैबिनेट के फैसले के मुताबिक ३० वॉटर कैनन पर २६.४० करोड़ और ८६ वङ्का वाहनों पर ३६.१२ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनका इस्तेमाल प्रदर्शन, दंगे, चुनावी रैलियां, त्योहार, जमीन विवाद और अन्य आपात स्थितियों में भीड़ नियंत्रण के लिए किया जाएगा। यानी सरकार ने कानून-व्यवस्था से निपटने के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने का फैसला किया है। लेकिन महिला सुरक्षा का सवाल इससे अलग है। हाल ही में पटना में कोचिंग से लौट रही १५ वर्षीय लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट का मामला सामने आया, जिसमें पुलिस ने मामला दर्ज कर सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों की पहचान की।
बिहार में लड़कियों से जुड़ी घटनाओं को लेकर केंद्रीय मंत्री और एनडीए सहयोगी चिराग पासवान भी सरकार से समय रहते कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है। ऐसे माहौल में सरकार का ६२.५२ करोड़ रुपये का यह फैसला सवाल खड़ा करता है कि क्या कानून-व्यवस्था का मतलब सिर्फ प्रदर्शन और भीड़ को नियंत्रित करना है, या सड़क पर आम नागरिक और बेटियों की सुरक्षा भी उसी प्राथमिकता में आती है? वॉटर वैâनन प्रदर्शनकारियों की भीड़ को नियंत्रित कर सकता है, वङ्का वाहन हिंसक भीड़ या दंगों से निपटने में इस्तेमाल हो सकता है। बड़ा सवाल यही है कि वॉटर वैâनन भीड़ को भगा सकता है, वङ्का वाहन दंगा रोक सकता है, लेकिन बेटी को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए सड़क पर पुलिस भी चाहिए।
५० लाख की रंगदारी ने खोली ‘सुरक्षा’ की पोल!
बिहार में सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती के दावे कर रही है, लेकिन अपराध की घटनाएं उन दावों के सामने सवाल खड़े कर रही हैं। अब ५० लाख रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आने के बाद कारोबारियों की सुरक्षा और अपराधियों के मन में कानून के डर को लेकर फिर बहस छिड़ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कारोबारी से इतनी बड़ी रकम मांगी जा रही है तो क्या अपराधियों को पुलिस-प्रशासन का कोई खौफ नहीं रह गया है? मामले में शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि उससे ५० लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। इतनी बड़ी रकम की मांग ने स्थानीय कारोबारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रंगदारी के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ रकम का नहीं होता। सवाल यह भी होता है कि धमकी देने वालों को पीड़ित तक पहुंचने, दबाव बनाने और दोबारा वार करने का भरोसा कहां से मिलता है? बिहार में उद्योग और रोजगार बढ़ाने की बात लगातार राजनीतिक मंचों पर होती है। लेकिन कारोबारियों के सामने अगर रंगदारी और धमकी का खतरा खड़ा हो जाए तो सरकार के लिए कानून-व्यवस्था का मुद्दा और गंभीर हो जाता है। व्यापारी वर्ग को कारोबार के साथ सुरक्षा का भरोसा भी चाहिए। सिर्फ घटना के बाद एफआईआर और गिरफ्तारी से ज्यादा जरूरी यह है कि ऐसे नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हो और अपराधियों तक कानून की पहुंच पहले से दिखाई दे।

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