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सूखा खेत से पेट तक महाराष्ट्र में समय से पहले पलायन शुरू

महाराष्ट्र का सूखा अब सरकारी फाइलों और घोषणाओं से निकलकर ग्रामीण परिवारों की रसोई और रोजी-रोटी तक पहुंच गया है। बीड, धुले और नंदुरबार के छोटे किसान तथा भूमिहीन मजदूर सामान्य मौसम से कई सप्ताह पहले ही गन्ना कटाई और दूसरे काम की तलाश में गांव छोड़ने लगे हैं।
आमतौर पर मजदूर दशहरे के बाद पश्चिमी महाराष्ट्र और कर्नाटक की चीनी मिलों की ओर जाते हैं। इस बार खरीफ फसल बर्बाद होने और गांवों में काम नहीं मिलने के कारण कई परिवार अगस्त-सितंबर में ही निकल गए। बीड के कठोड़ा गांव का एक परिवार पहली बार तमिलनाडु की चीनी मिल में काम करने पहुंचा है। एक वर्षीय बच्चा भी परिवार के साथ गया है। राज्य सरकार ने ३५८ में से २६५ तालुके सूखाग्रस्त घोषित किए हैं। इसके बावजूद स्थानीय रोजगार योजनाओं का काम मजदूरों तक नहीं पहुंचने की शिकायत है। ठेकेदार से अग्रिम रकम लेने के कारण कई परिवार पूरे मौसम के लिए कठिन श्रम और कर्ज के चक्र में बंध रहे हैं।
मुंबई में सितंबर की बारिश
२० प्रतिशत कम
सांताक्रुज में सितंबर के दौरान ३०४.२ मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत ३८३.५ मिलीमीटर है। अगस्त में भी उपनगरों को औसत की केवल ५७ प्रतिशत बारिश मिली थी। लगातार दो महीनों की कमी ने झीलों में उपलब्ध पानी और मई २०२७ तक उसके टिकने के मनपा के अनुमान पर चिंता बढ़ा दी है।
फसलें चौपट, गांवों में काम नहीं; गन्ना काटने के लिए अगस्त-सितंबर में ही घर छोड़ने को मजबूर परिवार

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