-खुफिया इनपुट ने खड़े किए रोंगटे, हिंदुस्तान को अब
तक का सबसे गहरा जख्म देने की दुश्मन ने रची साजिश
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को तेज करने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कथित तौर पर नया और बेहद गंभीर मंसूबा तैयार किया है। खुफिया इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान सेना और नौसेना के सेवानिवृत्त सैनिकों तथा पूर्व कमांडो को लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकी संगठनों में शामिल करने की कोशिश की जा रही है, ताकि प्रशिक्षित कैडर की कमी को तेजी से पूरा किया जा सके।
रिपोर्टों का दावा है कि ऐसे पूर्व सैन्यकर्मियों को हथियार संचालन, सामरिक कार्रवाई, घुसपैठ, संचार और कठिन भूभाग में काम करने का पहले से अनुभव होता है। इसलिए उन्हें छोटी आतंकी टुकड़ियों के साथ जोड़कर कम समय में अभियान के लिए तैयार किया जा सकता है। खुफिया आकलनों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के लॉन्चपैड और आतंकी ढांचे को सक्रिय रखने की कोशिशों का भी उल्लेख है। मकसद कथित तौर पर यह सुनिश्चित करना बताया गया है कि आतंकी संगठनों को नेतृत्व, प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक की कमी न हो। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पाकिस्तान की ओर से भी इसकी आधिकारिक स्वीकारोक्ति सामने नहीं आई है। क्या पूर्व सैनिकों की भर्ती के जरिए सीमा पार आतंकवाद को अधिक सैन्य प्रशिक्षित और घातक स्वरूप देने की तैयारी हो रही है?
क्यों खतरनाक है यह नई रणनीति?
पूर्व सैनिकों की संभावित भर्ती का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इससे आतंकी संगठनों को बिना लंबी ट्रेनिंग के ऐसे लोग मिल सकते हैं, जिन्हें हथियार संचालन, सामरिक मूवमेंट, संचार, निगरानी और दुर्गम इलाकों में काम करने का अनुभव हो। खुफिया इनपुट में आशंका जताई गई है कि ऐसे लोगों को छोटे आतंकी मॉड्यूल का नेतृत्व सौंपा जा सकता है। इससे घुसपैठ के बाद समूहों की संचालन क्षमता और टिकाऊपन बढ़ सकता है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती केवल नए आतंकियों की पहचान नहीं, बल्कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त लोगों की कार्यशैली को पहले से समझना भी होगी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कबाइलियों के पीछे फौजी-कश्मीर में पुराना पाकिस्तानी पैटर्न
कश्मीर में सैन्य प्रशिक्षित लोगों को गैर-नियमित लड़ाकों के साथ उतारने का आरोप नया नहीं है। १९४७-४८ के पहले भारत-पाक युद्ध के दौरान भी उत्तर-पश्चिम सीमांत क्षेत्र से कबाइली हमलावर जम्मू-कश्मीर में घुसे थे। समकालीन अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों में भारतीय पक्ष के उस आरोप का उल्लेख मिलता है कि पाकिस्तान सैनिकों को सादे कपड़ों में और कबाइलियों के साथ कश्मीर भेज रहा था।
असम-बंगाल में युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे थे बांग्लादेशी
एनआईए ने तीन राज्यों में छापेमारी कर १३ आरोपियों को दबोचा
टेलीग्राम समूह ‘पूर्व आकाश’ को लेकर एनआईए की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एनआईए के मुताबिक, इस समूह को कट्टरपंथ फैलाने के लिए बनाया गया था। यहां पर ‘पूर्व आकाश’ यानी ईस्टर्न स्काई बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठन ने पूर्वोत्तर राज्यों में कट्टरपंथ फैलाने के लिए टेलीग्राम पर ‘पूर्व आकाश’ समूह बनाया था। इस समूह में कई बांग्लादेशी हैंडलर भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल, असम समेत कई पूर्वोत्तर राज्य निशाने पर थे। यह समूह जेएमबी-आईएमके के नेटवर्क विस्तार की रणनीति का हिस्सा है। एनआईए के मुताबिक, जेएमबी के वरिष्ठ सदस्य इमाम महमूद हबीबुल्लाह ने आईएमके बनाया। एनआईए ने हाल ही में तीन राज्यों असम, पश्चिम बंगाल और केरल में १६ जगहों पर छापेमारी की थी। एनआईए की कार्रवाई में १३ आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। े
