-शिंदे के मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप, फडणवीस सरकार कटघरे में
-आश्रमशाला संचालक का दावा, `संजय शिरसाट के पीए ने मांगे लाखों रुपए’
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल शिंदे गुट के मंत्री संजय शिरसाट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने सत्तारूढ़ महायुति के भीतर सवाल खड़े कर दिए हैं। धाराशिव के आश्रमशाला संचालक अरुण नीटूरे ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में शिरसाट, उनके कथित निजी सहायक और समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नीटूरे का दावा है कि आश्रमशालाओं का अनुदान वर्षों से अटका हुआ है और कुछ कामों तथा मंजूरियों के बदले कथित तौर पर ३५ से ४० लाख रुपए तक की मांग की जाती है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वीडियो में नीटूरे ने सीधे मंत्री शिरसाट को संबोधित करते हुए आश्रमशालाओं के लंबित अनुदान का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि गरीब और पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए चल रही आश्रमशालाओं को वर्षों से सरकारी अनुदान नहीं मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई शिक्षक लंबे समय से बिना वेतन काम कर रहे हैं और कुछ कर्मचारी वर्षों की सेवा के बाद भी आर्थिक संकट में हैं।
नीटूरे ने आरोप लगाया कि फाइलों और मंजूरियों को आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर पैसे की मांग की जाती है। उन्होंने मंत्री के निजी सहायक भंडारे पर एक छात्रावास के २४ बच्चों की मंजूरी के लिए ३५ से ४० लाख रुपए मांगने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि उनके पास इन आरोपों से संबंधित साक्ष्य हैं और जरूरत पड़ने पर वे उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत करने को तैयार हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या फडणवीस सरकार करेगी निष्पक्ष जांच?
आश्रमशाला संचालक के आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब शिरसाट पहले भी अपनी संपत्ति और अन्य विवादों को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। २०२५ में उनके खिलाफ संपत्ति वृद्धि को लेकर आयकर विभाग का नोटिस सामने आया था। अब धाराशिव के आश्रमशाला संचालक द्वारा सीधे मुख्यमंत्री से जांच की मांग किए जाने के बाद निगाहें सरकार पर हैं। सवाल यह है कि क्या फडणवीस सरकार अपने ही मंत्रिमंडल में शामिल शिंदे गुट के मंत्री पर लगे इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच कराएगी?
