-जून में राहुल गांधी ने दी थी बड़े आर्थिक संकट की चेतावनी, अब विदेश मंत्री ने गिनाए भोजन, र्इंधन, उर्वरक और वित्त के चार खतरे
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘आर्थिक सुनामी’ वाली चेतावनी को मोदी सरकार ने भले ही राजनीतिक बयान बताकर खारिज किया हो, लेकिन अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चिंता भी उसी खतरे की ओर संकेत करती दिखाई दे रही है। राहुल गांधी ने जून में दावा किया था कि देश एक बड़े आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा है। अब जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर भोजन, र्इंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़े ‘४एफ संकट’ की गंभीर चेतावनी दी है।
न्यूयार्क में एशिया सोसायटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों से वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था भारी दबाव में है। उर्वरकों की कमी कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जबकि र्इंधन महंगा होने से परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक की कीमतें बढ़ने का खतरा है। खाद्य आपूर्ति बाधित हुई तो विकासशील देशों को महंगाई, बेरोजगारी और वित्तीय अस्थिरता का तिहरा झटका लग सकता है।
हालांकि, जयशंकर ने सीधे राहुल गांधी का समर्थन नहीं किया और उनकी चेतावनी मुख्यत: वैश्विक संकट तथा ‘ग्लोबल साउथ’ के संदर्भ में थी। फिर भी सवाल यह है कि जब सरकार के अपने विदेश मंत्री संकट की घंटी बजा रहे हैं, तब महंगाई, खाद्य सुरक्षा और उर्वरक आपूर्ति से निपटने की राष्ट्रीय तैयारी क्या है? आर्थिक सुनामी आने से पहले सरकार राहत की दीवार खड़ी करेगी या फिर जनता को एक बार और ‘वैश्विक परिस्थितियों’ के भरोसे छोड़ देगी?
खाने के संकट की आहट!
कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला
देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने के बीच कांग्रेस ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि आने वाले महीनों में खाने-पीने की चीजों का संकट गहरा सकता है। पार्टी ने कहा कि देश पहले ही ऊर्जा संकट और खाद की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में खाद्य संकट की आशंका सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को जनता की चिंता करने की फुर्सत नहीं है।
