मुख्यपृष्ठनए समाचारउलटी गिनती शुरू हो गई...‘नौकरी दो, भाषण नहीं!’

उलटी गिनती शुरू हो गई…‘नौकरी दो, भाषण नहीं!’

-निर्मला सीतारमण के सामने फूटा जनता का गुस्सा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

आंध्र प्रदेश के रायलसीमा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कार्यक्रम उस वक्त अचानक हंगामे में बदल गया, जब रोजगार के सवाल पर लोगों ने कथित तौर पर जोरदार विरोध शुरू कर दिया। मंच से भाषण शुरू होते ही भीड़ की ओर से ‘पहले नौकरी दो’ के नारे सुनाई देने लगे। देखते ही देखते माहौल इतना गर्म हो गया कि वित्त मंत्री को अपना भाषण बीच में रोकना पड़ा। मंच पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, उप मुख्यमंत्री पवन कल्याण और अन्य प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं। अचानक उठे विरोध ने मंच पर बैठे नेताओं को भी असहज कर दिया। स्थिति संभालने के लिए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडूू को खुद खड़ा होकर लोगों से शांत रहने की अपील करनी पड़ी।
चुनावी मंचों पर विकास, निवेश और रोजगार के बड़े-बड़े दावे
चुनावी मंचों पर विकास, निवेश और रोजगार के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब जनता उसी रोजगार का हिसाब मांगने लगे तो भाषण के शब्द क्यों लड़खड़ाने लगते हैं? सवाल सीधा है कि अगर युवाओं को नौकरी चाहिए और सरकार के पास विकास का दावा है, तो फिर रोजगार मांगने वाली आवाजों को शांत कराने की नौबत क्यों आई? सियासत में नारों का जवाब नारों से दिया जा सकता है, लेकिन बेरोजगारी का सवाल सिर्फ भाषण से नहीं दबाया जा सकता। जनता अगर मंच से ही पूछने लगे, ‘पहले नौकरी दो, भाषण बाद में’, तो इसे सरकार के लिए महज हूटिंग मानना शायद सबसे बड़ी भूल होगी।

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