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सीयूएसबी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खेल विज्ञान के एकीकरण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

 अनिल मिश्र / पटना

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ आज गुरुवार (8 अक्टूबर) को उद्घाटन सत्र के साथ हुआ। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में शिक्षा संकाय के अंतर्गत संचालित शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी का विषय ‘शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एकीकरण : अवसर, चुनौतियां एवं भविष्य की संभावनाएं’ है। संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन की निगरानी, चोट की भविष्यवाणी, रणनीतिक विश्लेषण, स्वास्थ्य संबंधी निदान तथा मानवीय प्रदर्शन जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रौद्योगिकियों द्वारा किए जा रहे वर्तमान परिवर्तनों को समझना तथा इस विषय पर शैक्षणिक संवाद को आगे बढ़ाना है। उद्घाटन सत्र में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कार्यक्रम निदेशक प्रो. आशीष कुमार सिंह, संयोजक डॉ. राहुल सिंह, प्रो. रवि कांत, प्रो. उषा तिवारी सहित आयोजन समिति के अन्य पदाधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में बिहार खेल विश्वविद्यालय, राजगीर, बिहार के कुलपति शिशिर सिन्हा ने खेलों में तकनीकी नवाचार, खिलाड़ियों के प्रदर्शन के वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। सिन्हा ने कहा कि भारत सहित पूरी दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को तेजी से स्वीकार किया गया है, लेकिन यह मानव मस्तिष्क की विशिष्ट विशेषताओं को पीछे नहीं छोड़ सकती। उन्होंने मानवीय मूल्यों से समझौता किए बिना नैतिकता के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर बल दिया। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मूल मंत्र ‘सूचना प्रौद्योगिकी + भारतीय प्रतिभा = भारत का भविष्य’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और भारतीय प्रतिभा भारत के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने संगोष्ठी के विषय की महत्ता पर बल देते हुए आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी से ऐसे सार्थक निष्कर्ष सामने आएंगे, जिन्हें नीति-निर्माताओं के साथ साझा किया जा सके। प्रो. सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वर्तमान दौर में शिक्षा एवं खेल विज्ञान के बदलते परिदृश्य, अनुसंधान एवं नवाचार की आवश्यकता तथा विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उभरते अवसरों पर भी अपने विचार व्यक्त किए। सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने दैनिक जीवन के उदाहरणों तथा रोजमर्रा के कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के माध्यम से संगोष्ठी के विषय को संवादात्मक ढंग से समझाया। जन संपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि औपचारिक उद्घाटन के पश्चात शिक्षा संकाय के अधिष्ठाता एवं कार्यक्रम निदेशक प्रो. आशीष कुमार सिंह ने स्वागत संबोधन में संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता, शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका तथा इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही शैक्षणिक पहलों पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात संगोष्ठी के संयोजक डॉ. राहुल सिंह ने संगोष्ठी की रूपरेखा एवं उद्देश्यों का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने संगोष्ठी के विभिन्न आयामों, प्रतिभागियों की सहभागिता तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान के बीच बढ़ते अंतर्संबंध को रेखांकित किया। उद्घाटन सत्र के अंत में प्रो. उषा तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संगोष्ठी के लिए कुल 250 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है तथा शोध-पत्र प्रस्तुत करने के लिए 172 शोध-पत्र स्वीकार किए गए हैं। उद्घाटन सत्र के पश्चात विशेषज्ञों ने संगोष्ठी के विषय पर व्याख्यान दिए। इसके उपरांत तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों द्वारा शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया।

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