-दस प्रौद्योगिकियों के लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर
उमेश गुप्ता / वाराणसी
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान वाराणसी द्वारा शुक्रवार को भिंडी, लोबिया एवं कुकुरबिट्स प्रौद्योगिकी दिवस–2026 का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश की 45 से अधिक प्रतिष्ठित बीज कंपनियों एवं कृषि-व्यवसाय संगठनों के 80 से अधिक प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्थान द्वारा विकसित उन्नत सब्जी फसल प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन, उद्योग जगत के साथ सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श तथा किसानों एवं बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान को प्रोत्साहित करना था।
इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने प्रतिभागी कंपनियों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा कृषि क्षेत्र में उद्योगों के साथ साझेदारी के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कृषि अनुसंधान की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब प्रयोगशालाओं एवं अनुसंधान केंद्रों में विकसित प्रौद्योगिकियाँ किसानों के खेतों तक पहुंचकर उनकी उत्पादकता, आय एवं आजीविका में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। उन्होंने उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद, सहयोग एवं साझेदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया तथा कार्यक्रम में शामिल सभी कंपनियों एवं प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण आईसीएआर–आईआईवीआर द्वारा तीन कंपनियों के साथ दस सब्जी प्रौद्योगिकियों के लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किया जाना रहा। इंडो यूएस बायो-टेक लिमिटेड, अहमदाबाद, गुजरात के साथ टमाटर की ‘काशी आदर्श’, गाजर की ‘काशी अरुण’, कद्दू की ‘काशी बसंत’, इंडियन बीन की ‘काशी बौनी सेम-3’, लोबिया की ‘काशी कंचन’, खीरा संकर ‘काशी नूतन’, मिर्च संकर ‘काशी सुर्ख’ तथा बैंगन संकर ‘काशी उत्सव’ सहित आठ प्रौद्योगिकियों के लिए लाइसेंसिंग समझौते किए गए। कंपनी की ओर से श्री समर्थ पटेल ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इसी क्रम में एग्रोविन एग्री सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, बेगूसराय, बिहार के साथ मटर की ‘काशी पूर्वी’ तथा देवा सीड्स, जालौन, उत्तर प्रदेश के साथ मटर की ‘काशी उदय’ के लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन कंपनियों की ओर से क्रमशः श्री उत्पल कुमार एवं श्री लक्ष्मण गुर्जर ने समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से संस्थान की उन्नत सब्जी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायिक उपयोग तथा किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में सहयोग को बल मिलेगा।
कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी प्रदर्शन के साथ-साथ उद्योग जगत एवं वैज्ञानिकों के बीच विचार-मंथन सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें कंपनियों की आवश्यकताओं, किसानों की समस्याओं, बाजार की बदलती मांग तथा भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागी कंपनियों से प्राप्त सुझावों एवं सकारात्मक प्रतिक्रियाओं ने आवश्यकता-आधारित अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने की नई संभावनाएँ प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम में संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डी.पी. सिंह, डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. के.के. पांडेय, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. प्रदीप कर्मकार, डॉ. विकास सिंह, डॉ. आर.के. दुबे, डॉ. सुदर्शन मौर्य, डॉ. जगेश कुमार तिवारी, डॉ. येरासु सुरेश रेड्डी एवं डॉ. बिनोद कुमार सिंह तथा वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ज्योति देवी, वैज्ञानिक डॉ. के.के. गौतम सहित संस्थान के अन्य वैज्ञानिक एवं अधिकारी उपस्थित रहे। सभी वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव एवं सुझावों के माध्यम से कार्यक्रम को सार्थक बनाने में योगदान दिया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. इंदिवर प्रसाद, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सदस्य सचिव, संस्थान प्रौद्योगिकी प्रबंधन समिति, आईसीएआर–आईआईवीआर, वाराणसी द्वारा किया गया।
