मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
उत्तर प्रदेश में दवा के नाम पर प्रतिवंध कोडीनयुक्त सीरप के सप्लाई की चेन टूटने का नाम नहीं ले रही है। इस बार एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने कानपुर शहर में बाबूपुरवा के ढकनापुरवा इलाके से छापेमारी करके एक शातिर तस्कर को रंगे हाथों धर दबोचा है। आरोपी के पास से प्रतिबंधित कोडीनयुक्त सीरप की 2500 शीशियां बरामद हुई हैं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ 95 लाख रुपये बताई जा रही है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के प्रभारी अयनुद्दीन के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम मिहिर कुमार ठाकुर बताया है। वह मूल रूप से बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है और फिलहाल कानपुर के बर्रा क्षेत्र में किराए पर रह रहा था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ‘टर्बो-टी’ नाम की यह नशीली सीरप नई दिल्ली के मंगोलपुरी स्थित ‘नोवोट्रिक्स लाइफसाइंसेस’ नाम की फर्म से मंगवाई गई थी। इसे फर्जी बिल के सहारे वाराणसी के सारनाथ स्थित एक ट्रेडर्स के पते पर भेजा जाना था।
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कुछ दिन पहले इसी गिरोह और इसी फर्म की सीरप की एक खेप प्रयागराज में पकड़ी जा चुकी है। प्रयागराज में हुई कार्रवाई के बाद तस्कर सतर्क हो गए थे और बचा हुआ माल कानपुर के एक ट्रांसपोर्ट से उठवा लिया गया था। पकड़ाने के डर से आरोपी ने इस स्टॉक को बाबूपुरवा के एक गोदाम में छिपाकर रख दिया था। यहां से इस माल को प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के जिलों में सप्लाई करने की पूरी योजना थी। इस संदर्भ में बाबूपुरवा थाना प्रभारी नीरज ओझा ने बताया कि एंटी नारकोटिक्स टीम की तहरीर पर आरोपी मिहिर कुमार ठाकुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब दिल्ली की संबंधित फर्म और वाराणसी के कारोबारी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है। पुलिस की कोशिश है कि इस पूरे अंतर्राज्यीय नशीली दवाओं के सिंडिकेट से जुड़े बाकी लोगों को भी जल्द से जल्द बेनकाब किया जा सके।
