-महाराष्ट्र में पीङब्ल्यूडी के सड़क और निर्माण कार्यों पर एक साल तक रोक की तैयारी
-नासिक सिंहस्थ कुंभ के गैरजरूरी कामों पर भी गिरेगी गाज?
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र के ३०० से अधिक तालुकाओं में सूखे की घोषणा के बाद अब राज्य सरकार के सामने राहत और पुनर्वास के लिए भारी-भरकम राशि जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है। सूखा निवारण के लिए करीब ४५ हजार करोड़ रुपये की जरूरत के बीच केंद्र से मिलने वाली आर्थिक सहायता को लेकर अनिश्चितता ने फडणवीस सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वित्तीय दबाव के चलते राज्य में सरकारी खजाने से चलने वाली सड़क और अन्य निर्माण परियोजनाओं को अगले एक वर्ष तक स्थगित रखने की तैयारी है। इस फैसले की आंच नासिक में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की गैरजरूरी परियोजनाओं तक पहुंचने की आशंका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब किसानों की राहत और जरूरी विकास कार्यों पर खर्च की वैंâची चल रही है, तो क्या सरकारी प्राथमिकताओं में बदलाव होगा?
सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार सूखे से निपटने के लिए विभिन्न योजनाओं के खर्च की समीक्षा कर रही है। सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण कई योजनाओं के बजट में कटौती या उनके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की नौबत आ सकती है। राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अत्यावश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने और अन्य परियोजनाओं का खर्च रोकने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, सिंहस्थ कुंभ की किन परियोजनाओं पर रोक लगेगी, इस बारे में अभी आधिकारिक निर्णय स्पष्ट नहीं है।
सूखे की मार झेल रहे किसानों को राहत देने के लिए जहां बड़े पैमाने पर धन की जरूरत है, वहीं नागपुर में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन अधिवेशन के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने ८५ करोड़ रुपये का प्रारूप तैयार किया है।
कर्ज के सहारे चलेगा सरकार का कामकाज?
सूखे के कारण खरीफ की फसल को भारी नुकसान हुआ है और रबी की बुवाई के सामने भी चुनौतियां हैं। किसानों को आर्थिक सहायता, पेयजल की व्यवस्था और अन्य राहत उपायों के लिए बड़ी राशि की जरूरत होगी। ऐसे में सरकार के सामने अतिरिक्त कर्ज लेने का विकल्प भी महत्वपूर्ण हो गया है। यदि राजस्व और केंद्र से मिलने वाली सहायता के बीच बड़ा अंतर बना रहा, तो आगामी वित्तीय वर्ष में सरकारी खर्चों का प्रबंधन और कठिन हो सकता है।
