-बीजेपी के बागियों ने दिल्ली के आकाओं को घेरा, आरोपों से पार्टी में बढ़ी बेचैनी
सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा इन दिनों अंदरूनी कलह से भारी उलझन में है। सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच भाजपा में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद उम्मीदवारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप बढ़ता जा रहा है। भाजपा में बागी बने अनिल सोले और गिरीश व्यास ने जोरदार हमला करते हुए भाजपा के पैâसले पर ही सवाल उठा दिया है। भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन और निर्णय प्रक्रिया को दिल्ली वालों द्वारा थोपे जाने का गंभीर आरोप लगाया हैं। सोले ने कहा कि लोकल फैसले भी लोकल हित को न देखकर दिल्ली के वरिष्ठ नेता हमपर थोप रहे हैं। पार्टी भले ही इसे सामान्य मतभेद बताने की कोशिश करे, लेकिन इस विवाद से स्थानीय नेताओं की नाराजगी और दिल्ली से होने वाले पैâसलों को लेकर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है।
भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी उम्मीदवारी पार्टी के नियमों और परंपराओं के अनुसार तय हुई है और इसकी घोषणा दिल्ली से की गई। उन्होंने अनिल सोले तथा गिरीश व्यास के आरोपों को गलत बताया। हालांकि, उनका यह बयान विवाद को समाप्त करने के बजाय पार्टी की निर्णय प्रक्रिया पर बहस को और हवा देता है। सवाल यह है कि जब स्थानीय स्तर पर वरिष्ठ नेता ही उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया पर आपत्ति जता रहे हैं, तो क्या उनकी नाराजगी को केवल अनुशासन का हवाला देकर दरकिनार किया जा सकता है? उधर कोहले ने बताया कि वह पिछले ३५ वर्षों से भाजपा में काम कर रहे हैं और पार्टी में निर्णय हो जाने के बाद कार्यकर्ताओं को उसके पीछे खड़ा रहना चाहिए। उन्होंने अनिल सोले को अपना गुरु बताते हुए उनसे आशीर्वाद भी मांगा। यह अपील पार्टी के भीतर बिगड़े समीकरणों को संभालने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है। लेकिन असली सवाल अब भी कायम है कि उम्मीदवार चयन को लेकर उठी आपत्तियों का समाधान वैâसे होगा।
