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विद्यार्थियों के आंदोलन से घिरी फडणवीस सरकार…`सुधर जाओ वरना, सीएम की कुर्सी जा सकती है’… एनसीपी का महायुति सरकार को अल्टीमेटम

– उचित फैसला नहीं लिया गया तो विकराल होगा आंदोलन
-एनसीपी का `महायुति’ को अल्टीमेटम

सामना संवाददाता / पुणे

महाराष्ट्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के आंदोलन ने देवेंद्र फडणवीस सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पुणे में जारी महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के विरुद्ध आंदोलन के ग्यारहवें दिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक रोहित पवार ने महायुति सरकार को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने रविवार शाम तक विद्यार्थियों से बातचीत कर ठोस निर्णय लेने का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं हुआ तो सोमवार से आंदोलन का स्वरूप बदल सकता है और सीधे सीएम फडणवीस को हटाने की मांग की जाएगी।
रोहित पवार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष भीमनवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी मित्र बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार विद्यार्थियों की मांगों के मुकाबले अपने मित्र को बचाने को अधिक महत्व दे रही है। वे इस समय मित्र मोह में फंसे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अध्यक्ष को हटाने की मांग कई दिनों से उठ रही है, तो सरकार अब तक निर्णय क्यों नहीं ले रही है? पवार ने दावा किया कि भीमनवार की नियुक्तियों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में मुख्यमंत्री की भूमिका रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मित्र के संबंधों के कारण विद्यार्थियों की मांग पर फैसला टाला जा रहा है। यदि सरकार समय रहते निर्णय लेती, तो आंदोलन को इतना लंबा खींचने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अब आंदोलन विकराल होगा।
विद्यार्थियों को ‘शहरी नक्सली’ बताने पर भड़के रोहित
रोहित पवार ने आंदोलनकारी विद्यार्थियों को कथित तौर पर ‘शहरी नक्सली’ कहने और पैसे लेकर आंदोलन करने के आरोपों पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थी किसी के मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पवार ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने विद्यार्थियों की आवाज नहीं सुनी, तो मुख्यमंत्री और सरकार की जवाबदेही का सवाल भी उठेगा।

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