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शिवाजी पार्क पर जानेवाले प्रदर्शनकारियों को रोका, उठाया… शिवसेना भवन के बाहर राड़ा… आदित्य ठाकरे पुलिस से भिड़े…वैन पर चढ़े

-अमित ठाकरे, तेजस ठाकरे भी सड़क पर उतरे
-दादर में शिवसैनिकों का भयंकर तूफान
-शिवसेना और मनसे की चेतावनी के बाद हिरासत में लिए गए जेन जी की रिहाई

सामना संवाददाता / मुंबई

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में दादर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क पर आंदोलन कर रहे लोगों को पुलिस द्वारा रोके जाने और जबरन हिरासत में लेने के कारण कल माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। जब पुलिस आंदोलनकारियों को गाड़ियों में भरकर ले जा रही थी, तब शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे आक्रामक हो गए। उनके साथ तेजस ठाकरे और मनसे नेता अमित ठाकरे भी सड़क पर उतर आए। आदित्य ठाकरे ने शिवसेना भवन के बाहर पुलिसवैन को रोकने के लिए उस पर चढ़ गए। उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक आंदोलनकारियों को छोड़ा नहीं जाता, वे गाड़ी को आगे नहीं बढ़ने देंगे। देखते ही देखते हजारों शिवसैनिक शिवसेना भवन के पास जमा हो गए। आखिरकार पुलिस को झुकना पड़ा और आंदोलनकारियों को छोड़ना पड़ा। इसके बाद शिवसेना और मनसे के दबाव के चलते पुलिस को दादर इलाके से हिरासत में लिए गए अन्य सभी आंदोलनकारियों को भी रिहा करने का निर्णय लेना पड़ा।
रविवार को सीजेपी कार्यकर्ताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क पर अचानक आंदोलन शुरू कर दिया, जिसके बाद पूरे शिवाजी पार्क और दादर इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए सड़कों, बसों, लोकल ट्रेनों और मेट्रो मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और सुबह से ही संदिग्ध दिखने वाले लोगों को हिरासत में लिया जाने लगा था। यहां तक कि शिवाजी पार्क में टहलने आने वाले आम नागरिकों को भी पुलिस द्वारा जबरन गाड़ियों में ठूंसने से लोगों में भारी गुस्सा फैल गया। जैसे ही इस बात की खबर अमित ठाकरे को मिली, वे तुरंत सड़क पर उतर आए और पुलिस से सवाल-जवाब किए। इस बीच, सैकड़ों आंदोलनकारियों को पकड़कर शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन ले जाया गया। अमित ठाकरे जब पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें भी अंदर जाने से रोक दिया, जिसके विरोध में उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस स्टेशन के बाहर ही धरना शुरू कर दिया।
शिवसेना भवन के बाहर भी सीजेपी के आंदोलन के समर्थन में युवासेना की ओर से प्रदर्शन किया जाना था। इसके लिए आदित्य ठाकरे, तेजस ठाकरे, शिवसेना नेता व विधायक अनिल परब, सुनील प्रभु, स्थानीय विधायक महेश सावंत के अलावा शिवसेना और मनसे के कई पदाधिकारी मौजूद थे।
आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में यह पूरी भीड़ सीधे शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन पहुंची और बाहर ही डेरा डाल दिया। इस दौरान `भारतमाता की जय’, `वंदे मातरम’, `इंकलाब जिंदाबाद’, `जब-जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है’ और `ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे नारे गूंज उठे। इस मौके पर सीजेपी कार्यकर्ताओं के हाथों में तिरंगे झंडे भी नजर आए। हालात की नजाकत को समझते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे को बातचीत के लिए बुलाया। नेताओं ने मांग की कि पुलिस ने जिन भी आंदोलनकारियों को जबरन हिरासत में लिया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। करीब आधे घंटे चली बातचीत के बाद पुलिस ने सभी आंदोलनकारियों को छोड़ने पर सहमति जताई। जब आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे ने पुलिस स्टेशन के बाहर गाड़ी पर खड़े होकर इसकी घोषणा की, तो वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार जश्न मनाया।
शिवसैनिकों के आक्रामक तेवर के बाद आंदोलनकारियों को छोड़ा
जैसे ही उन्हें यह पता चला कि आंदोलनकारियों के साथ जोर-जबरदस्ती की जा रही है, शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे और अन्य नेता सड़कों पर आ गए। शिवसेना भवन के बाहर ही पुलिस की गाड़ियों को घेर लिया। इस दौरान जोरदार नारेबाजी से पूरा शिवसेना भवन परिसर गूंज उठा। विभिन्न इलाकों से आए सीजेपी के कार्यकर्ता भी इसमें शामिल हो गए। शिवसैनिकों और सीजेपी कार्यकर्ताओं के आक्रामक तेवर को देखते हुए पुलिस को वैन में बंद आंदोलनकारियों को आखिरकार छोड़ना पड़ा।

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