-देशभर में उठी विरोध की आवाज
-विपक्ष, सिविल सोसायटी, छात्र संगठनों ने किया मोदी सरकार का निषेध
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश की राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर सरकारी दमन का आरोप लगाते हुए विरोध की आवाज तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर विरोध जताने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से सियासी घमासान छिड़ गया है। विपक्ष ने मोदी सरकार पर `काले’ अंग्रेजों जैसी दमनकारी मानसिकता अपनाने का आरोप लगाया है। इस कार्रवाई के खिलाफ देशभर में आक्रोश है। विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और छात्र संगठनों ने सरकार के रवैये का निषेध करते हुए सवाल उठाया है कि क्या अब तिरंगा फहराना भी गुनाह हो गया है? कॉकरोच के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मौजूदा कार्रवाई की तुलना अंग्रेजों के शासनकाल से करते हुए कहा कि ब्रिटिश राज में सार्वजनिक रूप से तिरंगा फहराने वालों को जेल में डाल दिया जाता था।
बता दें कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने हिरासत का आदेश दिया। उनके साथी अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा किया गया। मंगलवार को सीजेपी नेता और कार्यकर्ता बैरिकेड तथा फाटक पार करके जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने तिरंगा लहराया, देशभक्ति के नारे लगाए और ऐतिहासिक प्रदर्शन-स्थल को जनता के विरोध के लिए ‘वापस लेने’ का दावा किया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने अनधिकृत प्रवेश, शांति बनाए रखने संबंधी बंधपत्र के कथित उल्लंघन और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा जैसे आरोप लगाए हैं। ये आरोप हैं; दोषसिद्धि नहीं। सीजेपी ने कार्रवाई को शांतिपूर्ण असहमति दबाने का प्रयास बताया है।
`तिरंगा लहराना अपराध नहीं’
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन में तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल में डालना कायरता है। छात्र, युवा, पत्रकार और `इंडिया’ गठबंधन अलग-अलग बैनर के साथ एक ही मुद्दे पर आवाज उठा रहे हैं।
`मोदी जी, क्या आप अंग्रेज हैं?’
संजय सिंह ने पीएम मोदी पर राजनीतिक हमला बोलते हुए सवाल किया, `मोदी जी, क्या आप अंग्रेज हैं?’ संजय सिंह ने राष्ट्रवाद, तिरंगे के सम्मान और राजनीतिक विचारधारा के मुद्दे को बहस के केंद्र में लाने की कोशिश की।
`पूरी पीढ़ी को डराकर चुप कराना चाहती है सरकार’
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि यह पूरी पीढ़ी को डराने और उसकी आवाज दबाने की कोशिश है। ममता ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
