मुख्यपृष्ठनए समाचार`आयोग पर से भरोसा डगमगाना लोकतंत्र की जड़ों में जहर जैसा'

`आयोग पर से भरोसा डगमगाना लोकतंत्र की जड़ों में जहर जैसा’

 -पूर्व जस्टिस जोसेफ ने भी चुनाव आयोग की व्यवस्था पर उठाए सवाल
-बोले, `लोकतंत्र के पहरेदारों के लिए नियम अलग-अलग क्यों?’

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच अब सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने भी आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी ईमानदारी पर से भरोसा उठना लोकतंत्र की जड़ों में जहर घोलने जैसा होगा। ऐसे में आयोग की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स, केरलम की ओर से आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति जोसेफ ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को पद से हटाने की प्रक्रिया में मौजूद अंतर समाप्त करने की मांग की।
जवाब देने से कब तक बचेगा?
चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। ऐसे में पूर्व न्यायमूर्ति की टिप्पणी ने आयोग की जवाबदेही, नियुक्ति प्रक्रिया और संवैधानिक स्वतंत्रता पर बहस को और तेज कर दिया है।

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