मुख्यपृष्ठटॉप समाचारछात्र बोले-दिल्ली में बने हैं मोदी नाजी डिटेंशन सेंटर!

छात्र बोले-दिल्ली में बने हैं मोदी नाजी डिटेंशन सेंटर!

-राहुल के सामने युवाओं ने सुनाई कथित पुलिस बर्बरता की कहानी
-गला दबाने, बाल पकड़कर घसीटने, गुप्तांगों पर लात मारने और बंद कमरे में पीटने के आरोप; राहुल गांधी ने कहा, अत्याचार के प्रमाण संभालिए, जवाबदेही तय कराएंगे

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

किसी ने थाने में सामूहिक पिटाई का आरोप लगाया, किसी ने पुलिस वाहन में लगातार मारपीट का। एक युवती ने बाल पकड़कर घसीटे जाने और बंद कमरे में डंडों से पीटे जाने की बात कही। दूसरे युवक ने बताया कि उससे मोबाइल का पासवर्ड मांगकर तस्वीरों और डिलीट की गई सामग्री तक की जांच की गई। दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए युवाओं ने बुधवार को राहुल गांधी की पत्रकार वार्ता में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयानों में हिरासत की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसकी तुलना कुछ युवाओं ने ‘नाजी हिरासत केंद्र’ से की। पत्रकार वार्ता में सामने आए बयान पुलिस कार्रवाई, हिरासत में सुरक्षा और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाते हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने युवाओं की बातें सुनकर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से तस्वीरें, वीडियो और दूसरे प्रमाण सुरक्षित रखने को कहा तथा भरोसा दिया कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी।
‘थाने से वाहन तक मारते रहे’
एक युवक ने आरोप लगाया कि उसे और उसके साथी को संसद मार्ग थाने ले जाकर लगभग १५ से २० पुलिसकर्मियों ने पीटा। उसके अनुसार, मारपीट करने वालों में सामान्य कपड़ों में मौजूद लोग भी शामिल थे। युवक ने एक व्यक्ति का नाम बहाव सिंह तोमर बताया।

‘गला दबाया, चेहरे पर नाखून मारे, बाल पकड़कर घसीटा’
एनएसयूआई की एक कार्यकर्ता ने महिला सिपाही चंचल यादव पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया। छात्रों ने बताया कि अंकित कसाना नाम के सिपाही पर भी आरोप लगाया कि संसद मार्ग से दिल्ली छावनी की ओर ले जाते समय रास्ते भर मारपीट की गई। युवक के अनुसार, जब उसके साथी की तबीयत बिगड़ी और उसे उल्टी आने लगी तो सहायता देने के बजाय उससे अपने थैले में उल्टी करने को कहा गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मारपीट के साथ उन्हें अपमानित भी किया गया। उनके अनुसार, पुलिसकर्मी अपनी अतिरिक्त ड्यूटी और नींद पूरी नहीं होने का दोष युवाओं पर डाल रहे थे। उनसे कहा गया कि वे पांच सौ रुपए लेकर प्रदर्शन करने आए हैं। युवाओं ने आरोप लगाया कि ऐसे शब्दों के साथ उन्हें डराने और आंदोलन में शामिल होने पर पछतावा कराने का प्रयास किया गया।
उसके अनुसार, पुलिस बस में उसका गला जोर से पकड़ा गया और धक्का देकर सीट पर गिराया गया। उसने कहा कि उसके चेहरे तथा कान के पास नाखूनों से खरोंचें मारी गर्इं और विरोध करने पर थप्पड़ मारा गया। युवती ने आरोप लगाया कि उसे बाल पकड़कर घसीटा गया। उसके बयान के अनुसार, मारपीट इतनी तीव्र थी कि कान की बाली कान के भीतर धंस गई क्योंकि उसके कान पर जूता रखकर रगड़ा गया था। उसे बाली चिकित्सक से निकलवानी पड़ी। उसने आगे आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस थाने के कमरा संख्या १०७ में ले जाकर सात से आठ लोगों ने उसे डंडों और लात-घूंसों से पीटा। युवती के अनुसार, उसके पैरों पर बार-बार डंडे मारे गए। ये आरोप केवल प्रदर्शन स्थल पर बल प्रयोग तक सीमित नहीं हैं। युवती के बयान के अनुसार, उसे हिरासत में लेने के बाद भी मारपीट जारी रही।
केरल की छात्रा के एक कान से सुनाई नहीं देने का आरोप
पत्रकार वार्ता में दिल्ली विश्वविद्यालय की केरल निवासी छात्रा अथिरा का मामला भी उठाया गया। उसने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उसके चेहरे पर बार-बार थप्पड़ों से प्रहार किए गए। राहुल गांधी ने कहा कि मारपीट के बाद उसके एक कान से सुनाई देना बंद हो गया है। अथिरा ने बताया कि जिस पुलिस बस में उसे रखा गया, उसमें महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थीं। उसने महिला सिपाही की मांग की, जिसके बाद बस कनॉट प्लेस थाने के बाहर रोकी गई। उसके आरोप के अनुसार, वहां उसके चेहरे पर प्रहार किए गए।
राजीव चौक के पास अस्थायी डिटेंशन सेंटर का आरोप
अर्जुन नाम के युवक ने आरोप लगाया कि राजीव चौक में एलआईसी के पास एक अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाया गया है, जहां आम लोगों और समाचार माध्यमों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा था। उसके बयान के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल छीन लिए गए और उनसे पासवर्ड मांगे गए। अर्जुन ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल में मौजूद तस्वीरों तथा डिलीट की गई सामग्री वाले खंड तक की जांच की। उसने दावा किया कि लगभग १० से १५ लोगों के मोबाइल बयान देने तक वापस नहीं मिले थे। उसने पुलिस वाहन के भीतर भी मारपीट का आरोप लगाया। उसके अनुसार, चार पुलिसकर्मी कतार में खड़े होकर हिरासत में लिए गए युवाओं को पीट रहे थे। अर्जुन ने कहा कि उसके चेहरे पर मुक्का मारा गया, उसे नीचे गिराकर छाती और पीठ पर लातें मारी गर्इं तथा उसका गला दबाया गया। उसने गुप्तांगों पर प्रहार किए जाने का भी आरोप लगाया। युवक के अनुसार, उसके साथ १६ से १७ वर्ष की आयु के किशोर भी थे। उसने दावा किया कि इनमें कुछ प्रदर्शन का हिस्सा भी नहीं थे और केवल कनॉट प्लेस में मौजूद होने के कारण पकड़ लिए गए। उन्हें भी कथित तौर पर मारपीट का सामना करना पड़ा, जबकि वे रो रहे थे और गिड़गिड़ा रहे थे।
इन बयानों के आधार पर यह प्रश्न उठता है कि अस्थायी डिटेंशन सेंटर किसके आदेश से बनाया गया था; वहां लाए गए लोगों का क्या रिकॉर्ड रखा गया; तथा किशोरों की आयु और पहचान की जांच किस तरह की गई। कई बच्चों को मोबाइल तक वापस नहीं मिले।
‘हमले के मामले लगा दिए’
युवाओं ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ वाहन के शीशे तोड़ने और महिला पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसे मामले दर्ज किए गए, जबकि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। पत्रकार वार्ता में युवाओं ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही की मांग की।
राहुल का संदेश; प्रमाण रखिए, डरिए मत
युवाओं की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उनके सामने मौजूद प्रदर्शनकारी अलग-अलग धर्मों, जातियों और पृष्ठभूमियों से आते हैं, लेकिन उनकी आवाज एक है। उन्होंने अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि यह देश की आवाज है और इसके रास्ते में खड़े होने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। राहुल ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने छात्रों से वीडियो बनाने, प्रमाण सुरक्षित रखने और कांग्रेस तक पहुंचाने को कहा है। उन्होंने नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार और संबंधित पुलिसकर्मियों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई मारपीट के लिए ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय कराई जाएगी। उन्होंने युवाओं को निर्भय रहने का संदेश दिया और भरोसा दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं। युवाओं ने भी कहा कि मारपीट और हिरासत के बाद वे आंदोलन से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
अब जांच और जवाबदेही का सवाल
पत्रकार वार्ता में सामने आए आरोपों में कई जांच योग्य विवरण हैं; पुलिसकर्मियों के बताए गए नाम, थाने का कमरा, पुलिस वाहन में हुई कथित मारपीट, अस्थायी हिरासत स्थल और मोबाइल की जांच। इनकी पुष्टि के लिए थानों तथा आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग, हिरासत के अभिलेख, वाहन में तैनात कर्मियों का विवरण और चिकित्सकीय दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। युवाओं के बयानों ने पुलिस कार्रवाई के बाद हिरासत में हुए कथित व्यवहार को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। ‘नाजी डिटेंशन सेंटर’ जैसी तीखी तुलना करने वाले युवाओं का आरोप है कि उन्हें केवल प्रदर्शन से हटाया नहीं गया; हिरासत में मारपीट, अपमान और धमकियों के जरिए उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया। अब इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और सामने आने वाले प्रमाणों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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