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हाईराइज इमारतों में सुरक्षा के इंतजाम फेल

-आग बुझाने की व्यवस्था सुस्त
-धुएं में दम तोड़ रहीं जिंदगियां
-नालासोपारा हादसे ने खोली अग्निसुरक्षा की पोल

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई महानगर क्षेत्र में आसमान छूती इमारतें तो तेजी से खड़ी हो रही हैं, लेकिन उनमें रहने वाले लोगों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम को नजरअंदाज किया जाता हैं। नालासोपारा की इम्पीरियल हाइट्स इमारत में लगी भीषण आग ने इस सवाल को फिर से खड़ा कर दिया है। दो महिलाओं की मौत, छह लोगों का अस्पताल पहुंचना और जान बचाने के लिए इमारत में फंसे लोगों की जद्दोजहद बताती है कि हाईराइज इमारतों में अग्निसुरक्षा की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।
मंगलवार, १३ अक्टूबर की देर रात नालासोपारा-वसई लिंक रोड स्थित इम्पीरियल हाइट्स में आग लग गई। इस हादसे में फाल्गुनी शाह और अश्विनी पारकर की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों की मौत धुएं के कारण दम घुटने से होने की आशंका है। छह अन्य लोगों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि २५ से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। एक परिवार के चार लोगों को क्रेन की मदद से बचाया गया। आग का वास्तविक कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा।
जिम्मेदार कौन?
हाईराइज इमारतों में फायर अलार्म, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, अग्निशमन पंप, धुआं निकालने की व्यवस्था और आपातकालीन सीढ़ियों का सुरक्षित होना बेहद जरूरी है।
आंकड़े डराते हैं, फिर भी सबक नहीं
मुंबई में आग की घटनाओं का सिलसिला लगातार चिंता बढ़ा रहा है। वर्ष २०२४ में मुंबई में आग लगने की ५,३०१ घटनाएं दर्ज हुर्इं, जबकि २०२३ में यह संख्या ५,०७४ थी। ये आंकड़े सभी प्रकार की आग की घटनाओं के हैं। दूसरी ओर, जनवरी २०२० से अक्टूबर २०२१ के बीच हाईराइज इमारतों में आग लगने की ३२४ घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें १२७ इमारतों की अग्निशमन व्यवस्था काम नहीं कर रही थी। यानी लगभग ३९ प्रतिशत मामलों में फायर सिस्टम निष्क्रिय पाया गया था।

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