-फिरोज खान
-नाबालिगों की अस्मत पर अपनों की नजर, विरोध करने पर हत्या
मुंबई में नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा का सवाल एक बार फिर गंभीर हो गया है। जिन लोगों पर परिवार भरोसा करता है, बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपता है, वही भरोसे की आड़ में दरिंदगी पर उतर आए तो आखिर माता-पिता किस पर विश्वास करें। कुर्ला-पश्चिम के बैल बाजार में १७ वर्षीय किशोरी की हत्या का मामला इसी भयावह सच्चाई को सामने लाता है। आरोप है कि पिता के दोस्त ने दुष्कर्म की कोशिश का विरोध करने पर किशोरी की गला घोंटकर हत्या कर दी।
घर के भीतर ही खतरा!
पुलिस के मुताबिक, किशोरी के माता-पिता अपने एक बेटे के इलाज के सिलसिले में उत्तर प्रदेश जाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने घर पर बच्चों की देखभाल के लिए अपने परिचित रामसिंह यादव को बुलाया था। परिवार को भरोसा था कि परिचित व्यक्ति बच्चों का ध्यान रखेगा। लेकिन आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने किशोरी के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश की। किशोरी ने विरोध किया और शोर मचाया तो आरोपी ने उसके सिर पर वार किया और गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। बाद में उसने पिता को फोन कर बेटी के बेहोश होने की सूचना दी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किशोरी को मृत घोषित कर दिया।
कुर्ला अकेला मामला नहीं
मुंबई और आसपास के इलाकों में बच्चियों के खिलाफ सामने आ रहे मामले चिंता बढ़ाते हैं। हाल ही में नई मुंबई के तुर्भे इलाके में नौ वर्षीय बच्ची की हत्या का मामला सामने आया।
बच्ची घर के पास खेलते समय लापता हुई थी और बाद में उसका शव मिला। पुलिस जांच में यौन उत्पीड़न और गला दबाकर हत्या किए जाने की बात सामने आई। वहीं, नई मुंबई के महापे गांव में एक आठ वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में उसके किरायेदार परिवार के मकान मालिक को गिरफ्तार किए जाने की खबर भी सामने आई। इन घटनाओं में आरोपियों की भूमिका और अपराधों की प्रकृति अलग-अलग है, लेकिन एक साझा चिंता है, बच्चियों के आसपास मौजूद लोगों की नीयत पर परिवार हमेशा नजर नहीं रख पाते।
रिश्ते का नाम सुरक्षा की गारंटी नहीं
बच्चियों के साथ अपराध करनेवाला हर व्यक्ति अनजान नहीं होता। कभी वह पारिवारिक परिचित होता है, कभी पड़ोसी, कभी मकान मालिक या देखभाल की जिम्मेदारी निभाने वाला व्यक्ति। भरोसेमंद होने का दावा किसी को बच्चों के साथ अकेला छोड़ने की अंधी गारंटी नहीं बन सकता। बच्चों को यह जरूर सिखाना होगा कि कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना ही परिचित क्यों न हो, उनके शरीर को गलत तरीके से छूने, डराने, चुप रहने के लिए दबाव डालने या उनकी इच्छा के विरुद्ध कुछ करने का अधिकार नहीं रखता।
पुलिस और समाज की जवाबदेही
ऐसे मामलों में केवल आरोपी की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं। जांच तेजी से पूरी हो, पीड़ित परिवार को न्याय मिले और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था बने यह पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्कूलों, आवासीय परिसरों और समुदायों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी जरूरी है।
