-सरकार को ‘मैट’ का समन
-मनपा की कार्यप्रणाली और महायुति सरकार के ‘कठपुतली शासन’ पर उठे गंभीर सवाल
सुरेश गोलानी / मुंबई
मीरा-भायंदर मनपा की अतिरिक्त आयुक्त प्रियंका राजपूत के अचानक तबादले ने प्रशासनिक और सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। प्रोटोकॉल उल्लंघन के विवाद में ६ अक्टूबर को उन्हें वसई-विरार मनपा में उप-आयुक्त के निचले पद पर भेज दिया गया। राजपूत ने इस पैâसले को महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (मैट) में चुनौती दी है।
विवाद १५ अप्रैल के खेल परिसर उद्घाटन और ५ मई के कर्मचारी सम्मान समारोह की निमंत्रण पत्रिकाओं में प्रोटोकॉल उल्लंघन से जुड़ा है। जांच समिति ने उप-अभियंता सचिन पवार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि नगर अभियंता दीपक खांबित को दोषमुक्त किया। इसके बावजूद राजपूत का कथित तौर पर पक्ष सुने बिना मध्य-कार्यकाल तबादला कर दिया गया।
प्रथमदृष्टया पदावनति का मामला
न्यायाधिकरण के सदस्य देबाशीष चक्रवर्ती ने इसे प्रथम दृष्टया पदावनति जैसा मामला माना है। नगर विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को २२ अक्टूबर, शाम ४ बजे वीडियो कॉन्प्रâेंसिंग से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई तक राजपूत के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई गई है। सवाल है; प्रोटोकॉल उल्लंघन की आड़ में प्रशासनिक कार्रवाई हुई या राजनीतिक हस्तक्षेप का खेल खेला गया?-मीरा-भायंदर में लोकतंत्र का सरेआम ‘मर्डर’
