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वोटर लिस्ट पर देशव्यापी संग्राम!

-३ करोड़ नाम कटने पर बवाल, दिल्ली से मुंबई तक उठे सवाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश की राजनीति में मतदाता सूची का विवाद अब एक बड़े राष्ट्रीय टकराव का रूप लेता जा रहा है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान १३ करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली से मुंबई, बंगलुरु और पटना तक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची में हुए बदलावों की निष्पक्ष जांच हो।
यह विवाद अब सिर्फ विपक्ष बनाम भाजपा नहीं रह गया है। सवाल उस प्रक्रिया की पारदर्शिता का है, जो तय करती है कि चुनाव में किस नागरिक का नाम मतदाता सूची में रहेगा और कौन अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेगा।
सफाई की प्रक्रिया या
मताधिकार पर संकट?
चुनाव आयोग के अनुसार, पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए नामों में लगभग २.८ करोड़ मृत मतदाता, ६.३ करोड़ स्थानांतरित मतदाता और ३ करोड़ ऐसे लोग शामिल थे, जिनका पता नहीं लगाया जा सका। आयोग का कहना है कि सूची से अपात्र और दोहराई गई प्रविष्टियां हटाना जरूरी है तथा गलत तरीके से हटाए गए मतदाता दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन विपक्ष का सवाल है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की गई? क्या हर प्रभावित व्यक्ति को पर्याप्त सूचना मिली? क्या गलत तरीके से हटाए गए नामों को समय पर बहाल करने की व्यवस्था प्रभावी है?
दिल्ली में तिरंगा मार्च, मुंबई और पटना तक पहुंचा विरोध
१६ अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य संगठनों के प्रदर्शन के बीच पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने हिरासत में लिया। छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। मुंबई और बेंगलुरु में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जबकि पटना में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। दिल्ली में प्रशासन ने सेंट्रल पार्क बंद रखा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन को लेकर चेतावनी दी गई थी और निर्धारित कानूनी प्रतिबंधों का पालन जरूरी है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी इसे चुनावी पारदर्शिता और असहमति के अधिकार की लड़ाई बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, आयोग से मांगा जवाब
विवाद ने न्यायिक मोर्चे पर भी अहम मोड़ लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगा। अदालत ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल से हटाने के फैसले पर भी सुनवाई करने और विरोध प्रदर्शनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
वोट सुरक्षित है या नहीं?
सरकार और चुनाव आयोग के सामने चुनौती है कि वे मतदाता सूची के संशोधन का आधार, हटाए गए नामों का विवरण और शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था पारदर्शी ढंग से स्पष्ट करें। विपक्ष को भी अपने आरोपों के समर्थन में सत्यापित आंकड़े और दस्तावेज सामने रखने होंगे।

चेन्नई में आयोजित प्रदर्शन में कनिमोझी ने दावा किया कि कोलाथुर विधानसभा क्षेत्र में करीब एक लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि उनके मुताबिक, लगभग २० हजार नाम ही हटाए जाने चाहिए थे। उन्होंने महाराष्ट्र में भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया और प्रभावित मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की।
‘आवाज उठाओ तो देशविरोधी का ठप्पा!’
कनिमोझी का केंद्र पर हमला
डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने चेन्नई में प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार से सवाल पूछने वालों को देशविरोधी करार देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।

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